
अभी बदरीनाथ थाम में चढ़ावा चोरी का विवाद खत्म नहीं हुआ है कि अब हरिद्वार के फेमस मनसा देवी मंदिर से ऐसी ही वाक्या सामने आ रहा है। दरअसल अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर सामने आए विवाद के बाद देशभर में मंदिरों में दान और चढ़ावे की व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
इसी बीच हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक व्यक्ति, जिसे मंदिर का कर्मचारी बताया जा रहा है, श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान को कथित तौर पर अपनी जेब में रखते हुए दिखाई दे रहा है। वीडियो के वायरल होने के बाद मंदिरों में दान व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

बदरीनाथ के बाद अब मनसा देवी मंदिर में चढ़ावा चोरी!
दरअसल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि मंदिर परिसर में बैठा एक व्यक्ति श्रद्धालुओं से दान प्राप्त कर रहा है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि श्रद्धालुओं द्वारा दी गई राशि को पहले दान पात्र या थाली में रखा जाता है और बाद में श्रद्धालु के वहां से हटते ही कुछ राशि जेब में रख ली जाती है। वीडियो को लेकर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और लोग मंदिरों में चढ़ावे की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं।
दान की रकम जेब में डालता दिखा पुजारी, Video
हालांकि वीडियो की पड़ताल करने पर ये जानकारी सामने आई है कि ये वीडियो हाल का नहीं बल्कि लगभग एक से दो वर्ष पुराना बताया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति मनसा देवी मंदिर में कार्यरत महेश दुबे नामक कर्मचारी है। हालांकि इस संबंध में मंदिर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। साथ ही वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि हो सकी है।

दान व्यवस्था पर उठ रहे हैं सवाल
धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालु अपनी आस्था और विश्वास के साथ दान अर्पित करते हैं। ऐसे में यदि दान राशि के दुरुपयोग या गबन से जुड़े आरोप सामने आते हैं तो यह न केवल श्रद्धालुओं की भावनाओं को प्रभावित करता है, बल्कि मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। वायरल वीडियो ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि मंदिरों में दान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है।
बिना जेब वाले कुर्ते का निर्णय चर्चा में
जानकारी के अनुसार, मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष द्वारा कुछ समय पहले मंदिर के पुजारियों और कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले कुर्ते पहनने का निर्णय लिया गया था। माना जा रहा है कि ये फैसला मंदिर परिसर में दान राशि के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी बनाने और किसी भी प्रकार की आशंका को समाप्त करने के उद्देश्य से लिया गया था।
मंदिर से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बिना जेब वाले कुर्ते की व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों और पुजारियों के पास व्यक्तिगत रूप से नकदी रखने की संभावना कम हो जाती है। जिससे श्रद्धालुओं के बीच विश्वास और मजबूत होता है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग वीडियो के आधार पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। जबकि कई लोगों का कहना है कि पुराने वीडियो को वर्तमान घटनाओं से जोड़कर प्रसारित किया जा रहा है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
