Gurmeet singh chandhok

हल्द्वानी। ज्योलीकोट में पीलिया संक्रमण फैलाने के बाद हाल में आई जांच रिपोर्ट में कई और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पीसीबी को मिली रिपोर्ट के मुताबिक 100-100 मिली के आठ सैंपल की जांच में सामने आया कि 2200 बैक्टीरिया ई-कोलीफॉर्म और फीकल कोलीफॉर्म पानी में पाए गए हैं। जो कि इंसानी शरीर के लिए किसी घातक बीमारी के कारक है। ज्योलीकोट इलाके में पीलिया और संक्रमण फैलने के बाद दो लोगों की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। जबकि कई लोग अस्पताल में भर्ती रहे। जिसमें से कई लोगों का अब भी इलाज चल रहा है। लगातार फैल रहे संक्रमण को देखते हुए बीती 8 सितंबर को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने ज्योलीकोट और आसपास के स्थानीय टैंक और जल स्रोतों के कुल आठ जगहों से सैंपल एकत्र किए थे। जिसकी रिपोर्ट में ई-कोलीफॉर्म और फीकल कोलीफॉर्म के होने की पुष्टि हुई थी। लेकिन अब आकलन के बाद पता लगा है कि आठ सैंपल यानि 800 मिलीलीटर (100-100 मिलीलीटर के आठ सैंपलों) पानी की जांच रिपोर्ट में ई-कोलीफॉर्म और फीकल कोलीफॉर्म के करीब 2200 घातक बैक्टीरिया पाए गए हैं। इन्हीं बैक्टीरिया की वजह से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उल्टी, दस्त, पीलिया और संक्रमण फैला था。
इन जगहों से लिए थे सैंपल
मनोरा, बेलुवाखान, मल्ला बेलुवाखान, वीरभट्टी स्थित चीनागांव, पार्वती प्रेमा जगाती विद्यालय के पास, देवुबागांजा वाटर टैंक, पीएमजीएसवाई ऑफिस के पास, चोपड़ा के बुशगांव वाटर टैंक और सरियाताल टैंक से पीसीबी की टीम ने पानी के सैंपल लिए थे।
बेहद घातक हैं ये बैक्टीरिया
डॉक्टरों का दावा है कि ये बैक्टीरिया मरीजों के शरीर में सिकुड़न पैदा करने के साथ-साथ आंतों और किडनियों पर भी गंभीर असर डाल रहे थे। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग, प्रदूषण विभाग और प्रशासन को पानी की दूसरी जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
आठ सैंपल पहली बार में लिए गए थे, जिनमें 2200 के करीब बैक्टीरिया के मौजूद होने के प्रमाण मिले हैं। लोगों को दूषित पानी के सेवन न करने के लिए कहा गया है। दो दिन के भीतर दूसरी रिपोर्ट भी आएगी।अनुराग नेगी, क्षेत्रीय अधिकारी, पीसीबी
