
हल्द्वानी।
हल्द्वानी स्थित अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/विशेष एनआई एक्ट न्यायालय ने ₹5 लाख के चेक बाउंस से जुड़े मामले में अभियुक्त नवेंदु जोशी पुत्र यतीन्द्र जोशी को दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने 16 सितंबर 2026 को मामले में निर्णय सुनाते हुए अभियुक्त को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के आरोप से बरी किया।
न्यायालय के समक्ष परिवादी अभिमन्यु सागर पुत्र मोहन लाल सागर की ओर से आरोप लगाया गया था कि परिवादी और अभियुक्त के बीच अच्छी जान-पहचान थी। इसी पहचान के चलते अभियुक्त ने जमीन खरीदने के लिए ₹5 लाख उधार मांगे थे। परिवादी के अनुसार उसने अभियुक्त को ₹5 लाख दिए और इसके एवज में अभियुक्त द्वारा दिया गया चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर वह “Funds Insufficient” की टिप्पणी के साथ अनादरित हो गया।
मामले में परिवादी की ओर से 29 जनवरी 2020 का ₹5 लाख का चेक संख्या 351427 न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। चेक के अनादरण के बाद परिवादी की ओर से अभियुक्त को कानूनी नोटिस भी भेजा गया था।
मुलजिम के अधिवक्ता लोकेश राज चौधरी द्वारा बताया गया कि परिवादी ने अपने परिवाद में यह बताया था कि अभियुक्त व परिवादी आपस में अच्छी पहचान थी और इसी पहचान के चलते अभियुक्त ने परिवादी से ₹500000 जमीन खरीदने के लिए मांगे थे और परिवादी ने नकद 5 लाख रुपए उधार दे दिए थे।
और अभियुक्त का यह कहना था कि मुलजिम ने परिवादी से केवल ₹50000 उधार मांगे थे और परिवादी द्वारा मुलजिम से, सिक्योरिटी में एक चेक रखवा लिया गया था और उन ₹50000 के बदले परिवादी ने 59,000 वापस भी ले लिए थे जो परिवादी के अकाउंट में मुलजिम के पिता ने चेक द्वारा जमा करे थे।
परिवादी ने साक्ष्य में यह छुपाया कि उसने मुलजिम के पिता से 59000 वापस ले लिए हैं और यह बात मुलाजिम ने अपने पिता का अकाउंट स्टेटमेंट दिखाकर सिद्ध करवा दी यही देखते हुए न्यायालय ने मुलजिम को दोष मुक्त किया।
अभियुक्त ने कोर्ट में क्या कहा?
अभियुक्त का बचाव था कि उसने परिवादी से ₹5 लाख नहीं, बल्कि ₹50 हजार उधार लिए थे। उसके अनुसार ₹50 हजार की राशि के बदले परिवादी ने सुरक्षा के तौर पर उससे चेक लिया था। अभियुक्त पक्ष का यह भी कहना था कि उक्त रकम वापस की जा चुकी है।
अभियुक्त पक्ष ने न्यायालय के समक्ष यह तथ्य रखा कि उसके पिता के खाते से ₹59 हजार परिवादी के खाते में चेक के माध्यम से जमा किए गए थे। बचाव पक्ष ने बैंक स्टेटमेंट सहित अन्य दस्तावेजी साक्ष्य भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए।
₹59 हजार के भुगतान का मुद्दा रहा अहम
मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी के बयान और प्रस्तुत साक्ष्यों पर न्यायालय ने विचार किया। निर्णय में ₹59 हजार के भुगतान से संबंधित तथ्य भी सामने आया, जिसे अभियुक्त पक्ष ने अपने बचाव में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया।
न्यायालय ने उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए माना कि परिवादी अभियुक्त के विरुद्ध लगाए गए आरोप को आवश्यक स्तर तक साबित नहीं कर सका। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि मामले में अभियुक्त के विरुद्ध धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के आरोप को सिद्ध करने के लिए आवश्यक साक्ष्य पर्याप्त रूप से स्थापित नहीं हुए।
कोर्ट ने नवेंदु जोशी को किया दोषमुक्त
मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/विशेष एनआई एक्ट न्यायालय, हल्द्वानी, जिला नैनीताल ने 16 सितंबर 2026 को आदेश पारित किया। न्यायालय ने अभियुक्त नवेंदु जोशी को धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के आरोप से दोषमुक्त कर दिया।










