
पहाड़ों की वादियों और शांत गांवों में अपना एक पक्का घर होना हर इंसान का सबसे बड़ा सपना होता है। बारिश, बर्फबारी और ठंड की मार झेलते कच्चे मकानों में रहने वाले उत्तराखंड के हजारों ग्रामीणों का यह सपना अब तेजी से पूरा हो रहा है। राज्य में धामी सरकार की मजबूत पैरवी और केंद्र सरकार के सहयोग से ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण’ (पीएमएवाई-जी) ने जबर्दस्त रफ्तार पकड़ ली है। वर्ष 2022 से लेकर अब तक प्रदेश के गांवों में रहने वाले 39,815 बेघर और जरूरतमंद परिवारों को उनके अपने सपनों का पक्का घर मिल चुका है। कच्चे और जीर्ण-शीर्ण मकानों की जगह अब गांवों में सुंदर और पक्के आशियाने नजर आ रहे हैं।
शहरखोजें
सीएम धामी की मजबूत पैरवी लाई रंग
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुरुआत से ही प्रदेश के हर गरीब और बेघर परिवार को सिर छिपाने के लिए पक्की छत देने पर विशेष जोर देते रहे हैं। उन्होंने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्र सरकार के सामने लगातार प्रदेश के ग्रामीण व शहरी इलाकों के लिए अधिक से अधिक आवास स्वीकृत कराने की मजबूत पैरवी की। इसी प्रभावी रणनीति का नतीजा है कि उत्तराखंड ने पीएम आवास योजना (शहरी) 2.0 में राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का पुरस्कार जीता, वहीं पीएम आवास योजना (ग्रामीण) में भी राज्य हर दिन नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
किस जिले में बने कितने आशियाने?
आवास वितरण के मामले में ऊधमसिंह नगर जनपद बाजी मारते हुए पहले स्थान पर रहा है, जहां सबसे ज्यादा 4,882 पक्के घर बनाए गए। इसके बाद हरिद्वार में 4,493 और सीमांत जिले रुद्रप्रयाग में 4,032 परिवारों को पक्की छत की सौगात मिली है।प्रदेश के अन्य जिलों का आंकड़ा भी काफी बेहतर है
- चमोली: 3,900 आवास
- पिथौरागढ़: 3,386 आवास
- पौड़ी गढ़वाल: 3,195 आवास
- उत्तरकाशी: 3,057 आवास
- देहरादून: 2,839 आवास
- चंपावत: 2,789 आवास
- बागेश्वर: 2,279 आवास
- टिहरी गढ़वाल: 2,134 आवास
- नैनीताल: 1,480 आवास
- अल्मोड़ा: 1,349 आवास
सिर्फ छत ही नहीं, रसोई से लेकर शौचालय तक की पूरी चिंता
वर्ष 2016 में शुरू हुई इस योजना का मकसद सिर्फ दीवारें खड़ी करना नहीं, बल्कि पूरे घर को बुनियादी सुविधाओं से संवारना है। योजना के तहत लाभार्थी के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए सीधे 1 लाख 30 हजार रुपये की अनुदान राशि भेजी जाती है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री धामी ने गृहिणियों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए किचन के बर्तन व सामान खरीदने के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को 5 हजार से बढ़ाकर 6 हजार रुपये कर दिया है। साथ ही, स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये और घर निर्माण के दौरान खुद काम करने के लिए वीबी रामजी योजना के तहत 95 दिन की मजदूरी भी दी जा रही है। यही नहीं, हर नए घर में पानी का कनेक्शन, उज्ज्वला योजना का गैस सिलेंडर और बिजली कनेक्शन देकर परिवार के जीवन को आसान बनाया जा रहा है।
“प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार हर जरूरतमंद परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। योजना का लाभ अंतिम पात्र व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड
