Gurmeet singh chandhok

देहरादून – उत्तराखंड में फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए आरक्षण का लाभ लेकर दाखिला लेने वालों पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। नीट यूजी 2026 की उत्तराखंड राज्य केंद्रीकृत काउंसलिंग के दौरान फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रवेश लिए जाने की शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जांच का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अब सभी आरक्षित श्रेणियों का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच और सत्यापन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन की ओर से की गई जांच में अब तक आठ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। इनके प्रमाणपत्र निरस्त करने के साथ ही संबंधित अभ्यर्थियों की प्रवेश प्रक्रिया भी निरस्त की जा चुकी है। वहीं, कुछ अन्य अभ्यर्थियों द्वारा अलग-अलग आरक्षित श्रेणियों में कूटरचित प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन स्तर पर जांच जारी है।
मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में यदि किसी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि फर्जी तथ्यों के आधार पर किसी भी अभ्यर्थी को अनुचित लाभ नहीं दिया जा सकता और इससे योग्य अभ्यर्थियों के हित प्रभावित होते हैं।

The Cost Of Hearing Aids In Agra Might Surprise You!
सीएम ने कहा कि फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए प्रवेश हासिल करना भी नकल जितना ही गंभीर अपराध है। सरकार किसी भी स्तर पर योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय नहीं होने देगी। प्रमाणपत्रों के सत्यापन के दौरान यदि कोई दस्तावेज कूटरचित पाया जाता है तो उसे तत्काल निरस्त करने के साथ दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
