
UKD के दोहरे चरित्र का पर्दाफाश, शिवसेना ने पूछे तीखे सवाल*
रिपोर्टर महेन्द्र सिंह बिष्ट
*हल्द्वानी शिवसेना कुमाऊं मंडल ने उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के दोहरे रवैये पर कड़ा प्रहार किया है। शिवसेना ने कहा कि एक तरफ UKD का युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष आशीष नेगी मुंबई जाकर उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ UKD की केंद्रीय कमेटी शिवसेना को “विचारधारा विहीन” बता रही है।
*शिवसेना ने ukd से पूछे 4 सवाल पूछे हैं:
- अनुशासन का दोहरा मापदंड क्यों? 1995 में जब राज्य आंदोलन के दौरान दिवाकर भट्ट जी ने शिवसेना से मदद मांगी थी, तब UKD ने यह कहकर विरोध किया था कि “महाराष्ट्र की पार्टी का उत्तराखंड में क्या काम”। आज उसी UKD का युवा अध्यक्ष चुपचाप उद्धव ठाकरे से मिल रहा है तो उसे “व्यक्तिगत मामला” बताया जा रहा है। क्या UKD में नेता का कद देखकर नियम बदलते हैं?
- कागजी कार्रवाई या ठोस एक्शन? भुवन जोशी जी का कहना है कि आशीष नेगी को “पत्र दे दिया गया है”। शिवसेना ने पूछा कि क्या पत्र लिखने से पार्टी चलती है? अगर कल को कोई और नेता कांग्रेस से मिल आएगा तो क्या तब भी सिर्फ पत्र ही दिया जाएगा? निष्कासन क्यों नहीं?
- कौन सी शिवसेना? UKD का कहना है कि “शिवसेना अब वो नहीं रही”। शिवसेना कुमाऊं ने स्पष्ट किया कि बिल्कुल सही बात है। इसीलिए हम कांग्रेस की गोद में बैठी UBT वाली नकली शिवसेना के साथ नहीं, बल्कि बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की विचारधारा वाली असली शिवसेना के साथ हैं, जिसका नेतृत्व आज माननीय एकनाथ शिंदे जी कर रहे हैं और जो NDA का मजबूत स्तंभ है।
- क्षेत्रीय विचारधारा की परिभाषा क्या है? UKD कहती है कि उसकी विचारधारा “क्षेत्रीय” है। शिवसेना ने सवाल उठाया कि अगर ऐसा है तो मुंबई-काठगोदाम ट्रेन चलने पर, जिससे 5 लाख प्रवासी उत्तराखंडियों को फायदा हुआ, UKD ने स्वागत क्यों नहीं किया? क्या मुंबई में बसे उत्तराखंडी UKD के “क्षेत्र” में नहीं आते?
“देवभूमि में पितरों का अपमान नहीं सहेंगे”: शिवसेना
शिवसेना ने कहा कि UKD ने राज्य आंदोलन के जिन बुजुर्गों के नाम पर राजनीति की, उन्हें ही मुंबई में भुला दिया। आज शिवसेना ही मुंबई जाकर उन आंदोलनकारी बुजुर्गों का सम्मान कर रही है।
शिवसेना ने UKD की केंद्रीय कार्यकारिणी को चुनौती दी कि वह स्पष्ट करे – उसे “पत्र लिखने वाली पार्टी” बनना है या “जनता के लिए ट्रेन और स्कूल लाने वाली NDA” के साथ विकास की मुख्यधारा में आना है।
“UKD कन्फ्यूज है, बिखरी हुई है। उनका युवा प्रकोष्ठ बेलगाम है और केंद्रीय बॉडी लाचार है। कुमाऊं का क्षेत्रीय वोट बैंक अब अनाथ है। NDA और शिवसेना ही पहाड़ के विकास की गारंटी है।” – शिवसेना, कुमाऊं मंडल
“UKD में घमासान: युवा अध्यक्ष उद्धव से मिले, केंद्रीय बॉडी ने बताया ‘व्यक्तिगत’, शिवसेना ने पूछा – ये दोगलापन क्यों?” या “1995 में शिवसेना का विरोध, 2026 में चुपचाप मुलाकात – शिवसेना ने UKD को दिखाया आईना”
- फोटो कैप्शन: अगर उद्धव-नेगी वाली फोटो लगाएं तो कैप्शन: _”UKD का दोहरा चरित्र: केंद्रीय बॉडी कहती है शिवसेना से परहेज, युवा अध्यक्ष मुंबई में उद्धव से गुप्त मुलाकात करते पकड़े गए।”
