Gurmeet singh chandhok

आज दिनांक 01 जून को एडीजे कोर्ट, हल्द्वानी में धनंजय गिरी द्वारा प्रस्तुत जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। न्यायालय द्वारा जमानत अर्जी को खारिज कर दिया गया तथा उसे किसी प्रकार की राहत नहीं मिली। इससे पीड़ित परिवारों और शिकायतकर्ताओं में न्याय मिलने की नई उम्मीद जगी है।
पीड़ितों का कहना है कि धनंजय गिरी पर आम जनता के साथ बड़े पैमाने पर आर्थिक धोखाधड़ी और विश्वासघात के गंभीर आरोप हैं। इसके अतिरिक्त, उसके विरुद्ध बीएनएस की धारा 111 (संगठित अपराध) सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। न्यायालय द्वारा जमानत न दिए जाने से शिकायतकर्ताओं को यह विश्वास मिला है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है तथा कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
इस घटनाक्रम के बाद धनंजय गिरी से कथित रूप से पीड़ित कई लोग अब खुलकर सामने आ रहे हैं तथा विशेष जांच दल (एसआईटी) के समक्ष अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वर्षों से दबे हुए कई मामले अब सामने आ रहे हैं और लोगों में यह भरोसा पैदा हुआ है कि उनकी बात सुनी जाएगी तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना है कि उन्हें सूत्रों से जानकारी मिली है कि धनंजय गिरी अथवा उससे संबंधित संस्थाओं पर जीएसटी की रिकवरी भी लंबित रही है। उनका सवाल है कि यदि ऐसी वित्तीय देनदारियां और सरकारी रिकवरी लंबित थीं, तो संबंधित बैंकों द्वारा उसे इतना बड़ा वित्तीय ऋण और बैंकिंग सुविधाएं किस आधार पर प्रदान की गईं तथा समय-समय पर उनका नवीनीकरण (रिन्यूअल) कैसे किया जाता रहा।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशा-निर्देशों के तहत किसी भी बड़े ऋण को स्वीकृत करने या उसका नवीनीकरण करने से पूर्व बैंक आमतौर पर उधारकर्ता की वित्तीय क्षमता, कारोबार के टर्नओवर, वैधानिक देनदारियों तथा गिरवी रखी गई संपत्तियों के दस्तावेजों का परीक्षण करते हैं। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि क्या सभी आवश्यक तथ्यों और वित्तीय दायित्वों का समुचित परीक्षण किया गया था अथवा नहीं।
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि यह मामला केवल धनंजय गिरी तक सीमित नहीं है, बल्कि उन बैंक अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए जिनकी कथित मिलीभगत, लापरवाही अथवा संरक्षण के कारण आम लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। उनका कहना है कि यदि पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच की जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं, जिससे इस पूरे मामले की सच्चाई उजागर होगी।
पीड़ित परिवारों ने कहा कि बैंक किसी व्यक्ति विशेष की संपत्ति नहीं, बल्कि देश की जनता की जमा पूंजी और राष्ट्र की आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार हैं। ऐसे में यदि किसी बैंक अधिकारी द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर जनता के धन के साथ खिलवाड़ किया जाता है, तो उसके विरुद्ध भी उतनी ही कठोर कार्रवाई होनी चाहिए जितनी किसी अन्य आरोपी के विरुद्ध की जाती है।
पीड़ितों ने राज्य सरकार, पुलिस प्रशासन तथा एसआईटी से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कर सभी दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके, दोषियों का पर्दाफाश हो तथा भविष्य में इस प्रकार के बड़े आर्थिक अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि इस मामले में जो भी धनजय के साथ इस मिलीभगत में शामिल अधिकारी थे उनके बारे में पुलिस के द्वारा पूछताछ की जा रही है । इस मिली भगत में शामिल अधिकारियों के ऊपर जल्द ही पुलिस के द्वारा अपना शिकंजा कसा जा सकता है
