Gurmeet singh chandhok
फरीदाबाद। एसबीआइ की सेक्टर-15 शाखा से दो करोड़ रुपये के आभूषण चोरी के मामले में पुलिस अभी चार्जशीट भी पेश नहीं कर पाई है, अब पंजाब नेशनल बैंक की ओल्ड फरीदाबाद शाखा के लाकर से 25 लाख रुपये का सोना गायब होने का आरोप लगा है। खाताधारक ने इस संबंध में ओल्ड फरीदाबाद थाना पुलिस को शिकायत भी दी है।
शिकायत के अनुसार सेक्टर-28 निवासी सुदेश कपूर ने साल 2013 में यहां लाकर लिया था। लाकर में उन्होंने अपनी व परिवार के बाकी सदस्यों की आभूष्ण रखे थे, जिसकी कीमत करीब 25 लाख रुपये है। शादी या किसी अन्य समारोह में जब उन्हें जरूरत पड़ती थी, तब वे लाकर से आभूषण निकालकर ले जाती थीं।
आखिरी बार 18 मई 2024 को उन्होंने लाकर ऑपरेट किया
13 साल में उन्होंने 40 बार अपना लाकर ऑपरेट किया है। आखिरी बार 18 मई 2024 को उन्होंने लाकर ऑपरेट किया। इसके बाद वह सात मार्च को बेटे आशीष के साथ बैंक पहुंची। लाकर में दो चाबी होती हैं, एक बैंक के पास रहती है दूसरी खाताधारक के पास। सात मार्च को बैंक की चाबी लाकर में लग गई मगर सुदेश की नहीं लगी।
बैंक प्रबंधन ने उन्हें दोबारा आने को कहा। इसके बाद वे 21 जुलाई को दोबारा पहुंची, इस बार भी उनकी चाबी नहीं लगी। तब बैंक प्रबंधन ने उनसे लाकर तोड़ने की सहमति ले ली। सुदेश का आरोप है कि 28 जुलाई को लाकर तोड़ा गया तो उसके अंदर से उनके सारे आभूषण गायब थे। इससे उनके होश उड़ गए।
बैंक की तरफ से आभूषणों के विषय में जानकारी न होने की बात कही गई। तब उन्होंने पुलिस को शिकायत दी। पुलिस का कहना है कि अभी मामले की जांच चल रही है। फोरेंसिक टीम लॉकर की जांच करेगी। यह देखा जाएगा कि बैंक से आभूषण किन परिस्थितियों में गायब हुए।
लॉकर में करीब दो करोड़ रुपये के आभूषण थे
ओल्ड फरीदाबाद थाना प्रभारी विष्णु मित्र का कहना है कि शिकायत मिल गई है मामले की जांच चल रही है। इस मामले में बैंक प्रबंधन ने पक्ष रखने से इंकार कर दिया। बता दें कि इससे पहले फरवरी में सेक्टर-15ए निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट डीसी गर्ग का लाकर एसबीआइ की सेक्टर-15 शाखा ने किसी अन्य के नाम अलाट कर चाबी सौंप दी थी। डीसी गर्ग का कहना है कि उनके लॉकर में करीब दो करोड़ रुपये के आभूषण थे।
इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर बैंक प्रबंधक सहित तीन को गिरफ्तार किया था। पुलिस को अभी तक इस मामले में पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं, इस कारण अभी तक चार्जशीट भी पेश नहीं हुई है। एसबीआइ ने पुलिस से कहा था कि बैंक में लाकर का साफ्टवेयर अपडेट किया गया था, उसमें तकनीकी गड़बड़ी के कारण डीसी गर्ग का लाकर किसी अन्य व्यक्ति को अलाट हो गया था
इस बीच उत्तराखंड में भी पीएनबी से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर शिकायतकर्ताओं ने बैंक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पूर्व में भी बैंक कर्मचारियों पर वित्तीय अनियमितताओं और कथित धोखाधड़ी के आरोप लग चुके हैं, जिनमें से कई मामलों को Helping Hand News ने भी प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उत्तराखंड से जुड़ा एक मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, जहां बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे। उनका कहना है कि न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा था और बैंक को अपने कर्मचारियों के विरुद्ध नियमों के अनुसार जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया था।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाती, तो इस प्रकार के मामलों की पुनरावृत्ति को रोका जा सकता था। उनका आरोप है कि कुछ मामलों में अधिकारियों द्वारा प्रभावी निगरानी नहीं किए जाने के कारण बैंक की छवि प्रभावित हुई है।
उन्होंने कहा कि पंजाब नेशनल बैंक देश के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक है, इसलिए इसकी विश्वसनीयता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। यदि किसी शाखा या कर्मचारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार, लापरवाही या अनियमितता की शिकायत सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
शिकायतकर्ताओं ने पीएनबी के शीर्ष प्रबंधन से मांग की है कि फरीदाबाद सहित अन्य राज्यों में सामने आए मामलों की पारदर्शी जांच कराई जाए तथा यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सिद्ध होती है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि इससे न केवल बैंक की साख मजबूत होगी बल्कि आम जनता का बैंकिंग व्यवस्था पर विश्वास भी कायम रहेगा।
