Gurmeet singh chandhok

आज जब दुनिया हाई-स्पीड इंटरनेट, वीडियो कॉलिंग और सेकंडों में डेटा ट्रांसफर की सुविधा का उपयोग कर रही है, तब इसके पीछे एक ऐसे वैज्ञानिक का योगदान है जिन्हें दुनिया “फादर ऑफ फाइबर ऑप्टिक” के नाम से जानती है। भारतीय मूल के महान वैज्ञानिक डॉ. नरिंदर सिंह कपानी ने फाइबर ऑप्टिक तकनीक को विकसित कर आधुनिक संचार क्रांति की मजबूत नींव रखी।
डॉ. नरिंदर सिंह कपानी का जन्म 31 अक्टूबर 1926 को पंजाब में हुआ था। शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने प्रकाश और ऑप्टिक्स के क्षेत्र में गहरी रुचि दिखाई। आगे चलकर उन्होंने लंदन के इम्पीरियल कॉलेज में शोध कार्य किया, जहां उन्होंने यह सिद्ध किया कि प्रकाश को कांच के बेहद पतले रेशों के माध्यम से मोड़कर एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जा सकता है। यही प्रयोग आगे चलकर फाइबर ऑप्टिक तकनीक का आधार बना।
साल 1954 में उनके शोध ने दुनिया को नई दिशा दी। बाद में उन्होंने “फाइबर ऑप्टिक्स” शब्द को लोकप्रिय बनाया और इस क्षेत्र पर पहली महत्वपूर्ण पुस्तक भी लिखी। वैज्ञानिक समुदाय में उन्हें इस तकनीक के अग्रदूत के रूप में मान्यता मिली।
फाइबर ऑप्टिक तकनीक का प्रभाव केवल इंटरनेट तक सीमित नहीं रहा। आज यह तकनीक दूरसंचार, केबल नेटवर्क, मेडिकल एंडोस्कोपी, लेजर सर्जरी, रक्षा और वैज्ञानिक उपकरणों में व्यापक रूप से इस्तेमाल हो रही है। दुनिया भर में बिछे ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के कारण ही तेज इंटरनेट और डेटा संचार संभव हो पाया है।
डॉ. कपानी केवल वैज्ञानिक ही नहीं बल्कि सफल उद्यमी और शिक्षाविद भी थे। उनके नाम 100 से अधिक पेटेंट दर्ज रहे और उन्होंने कई तकनीकी कंपनियों की स्थापना की। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2021 में उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया।
दिसंबर 2020 में 94 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी खोज आज भी दुनिया को जोड़ रही है। इंटरनेट और डिजिटल युग की इस क्रांति के पीछे डॉ. नरिंदर सिंह कपानी का योगदान हमेशा स्वर्ण अक्षरों में याद किया जाएगा।
