आज उच्च न्यायालय से धनंजय गिरी को जमानत नहीं मिली। यह मामला लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें अनेक शिकायतकर्ताओं ने स्वयं को ठगी और धोखाधड़ी का शिकार बताया है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच के दौरान पुलिस द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि मामला अत्यंत गंभीर प्रकृति का है। पूर्व आईजी कानून-व्यवस्था श्रीमती रिद्धिमा अग्रवाल के नेतृत्व में हुई जांच को लेकर भी लोगों ने विश्वास व्यक्त किया था और उम्मीद जताई थी कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होगी।
जनता एवं शिकायतकर्ताओं की मांग है कि इस प्रकरण में केवल आरोपित व्यक्तियों ही नहीं, बल्कि उन सभी अधिकारियों और संस्थाओं की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए जिनके संबंध में शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है तो उसकी भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना है कि उन्होंने अपने-अपने प्रार्थना पत्र और साक्ष्य पुलिस को उपलब्ध कराए हैं। वे चाहते हैं कि मामले की जांच पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़े तथा दोषी पाए जाने वाले सभी व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई हो।
जनहित में यह आवश्यक है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और आम जनता का कानून तथा वित्तीय न्याय प्रणाली पर भरोसा हो सके
