Gurmeet singh chandhok

नोए़डा: नोएडा के गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को 5 लाख का नोटिस देने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले को लेकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने नोएडा प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश था कि किसी छात्र पर कोई एक्शन नहीं होगा, फिर मजिस्ट्रेट की इतनी हिम्मत कैसे हुई कि वो नोटिस जारी करे। मजिस्ट्रेट कैसे हमारे आदेश का उल्लंघन कर सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट इस बारे में मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगेगा। हालांकि SC को जानकारी दी गई कि छात्र को दिया गया नोटिस वापस ले लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करने पर उठाया सवाल
लाइव-लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सवाल उठाया कि ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के प्रोटेस्ट के सिलसिले में छात्र को नोटिस कैसे जारी किया, जबकि सुप्रीम कोर्ट का पहले का आदेश इन विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी एफआईआर को रद्द कर चुका था। सीनियर एडवोकेट विश्वजीत भट्टाचार्य ने सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने मौखिक रूप से यह मामला उठाया।
जीबीयू के स्टूडेंट को जारी किया गया था नोटिस
रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वजीत भट्टाचार्य ने कोर्ट को बताया कि एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के सेकंड ईयर के स्टूडेंट अक्षत त्रिपाठी को एक नोटिस जारी किया था। इसमें उनसे कारण बताने को कहा गया था कि शांति बनाए रखने के लिए उन्हें 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड क्यों नहीं भरना चाहिए। वकील ने बताया कि बाद में यह नोटिस वापस ले लिया गया था
‘कार्रवाई से छात्रों में डर का माहौल बन सकता है’
भट्टाचार्य ने कोर्ट को बताया कि यह नोटिस नोएडा पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर जारी किया गया था और तर्क दिया कि ऐसी कार्रवाई से छात्रों में ‘डर का माहौल’ बन सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस कार्रवाई को कोर्ट की अवमानना के बराबर भी बताया। सीजेआई ने वकील से कहा कि वे एक याचिका के जरिए नोटिस को रिकॉर्ड पर लाएं और संकेत दिया कि सुप्रीम कोर्ट संबंधित अथॉरिटी से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगेगा।
पुलिस रिपोर्ट के आधार पर की गई थी कार्रवाई
रिपोर्ट में बताए गए 4 सितंबर, 2026 के नोटिस के अनुसार, ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने स्टूडेंट के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 135 के तहत कार्रवाई शुरू की। यह कार्रवाई एक पुलिस रिपोर्ट के आधार पर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अक्षत त्रिपाठी छात्रों को प्रस्तावित सीजेपी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसा रहे थे।
जानिए पुलिस रिपोर्ट में क्या आरोप लगाए गए
पुलिस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि अक्षत त्रिपाठी यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच ‘सरकार-विरोधी और गुमराह करने वाली बातें’ फैला रहे थे और उन्हें सीजेपी के प्रस्तावित धरने में शामिल होने के लिए उकसा रहे थे। इसमें यह भी कहा गया है कि उनकी इन कथित गतिविधियों से तनाव पैदा हुआ है। ‘लाइव-लॉ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट में कार्रवाई शुरू करने के लिए पर्याप्त आधार हैं। उन्होंने स्टूडेंट को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा कि क्यों न उनसे 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और 5-5 लाख रुपये की दो जमानतें भरने के लिए कहा जाए।
