
Gurmeet singh chandhok
महर्षि विद्या मंदिर, पपरशैली अल्मोड़ा में भारत सरकार के महिला व बाल विकास मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय शिल्प कौशल प्रशिक्षण और प्रदर्शनी का सफलतापूर्वक समापन हो गया। कार्यक्रम का आयोजन कार्यालय विकास आयुक्त (हस्तशिल्प सेवा केंद्र), अल्मोड़ा द्वारा हस्तशिल्प प्रसार अधिकारी भूमिका गर्ब्याल के निर्देशन में किया गया।
महर्षि विद्या मंदिर में तीन दिवसीय शिल्प कौशल प्रशिक्षण और प्रदर्शनी का हुआ समापन
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उत्तराखंड की समृद्ध लोक व पारंपरिक हस्तशिल्प कला से जोड़ते हुए उनमें स्वरोजगार, आत्मनिर्भरता और कौशल विकास की भावना विकसित करना था।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को ऐपण, कोरिया, ताम्र शिल्प और रिंगाल शिल्प पर आधारित विभिन्न कलाकृतियों एवं उपयोगी उत्पादों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने पारंपरिक शिल्प कलाओं का महत्व बताते हुए विद्यार्थियों को हस्तनिर्मित वस्तुएं तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया।

छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया
प्रशिक्षण के दौरान छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए ऐपण की पारंपरिक आकृतियां, कोरिया से सजावटी और उपयोगी वस्तुएं, ताम्र शिल्प की कलात्मक सामग्री तथा रिंगाल से निर्मित विभिन्न उत्पाद तैयार किए। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की रचनात्मकता, धैर्य और कलात्मक अभिरुचि की भी सराहना की गई।
पारंपरिक शिल्प कलाओं के संरक्षण के प्रति जागरूकता
विद्यालय प्रशासन ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों में स्थानीय संस्कृति के प्रति सम्मान, आत्मनिर्भरता और कौशल विकास को बढ़ावा देते हैं। साथ ही पारंपरिक शिल्प कलाओं के संरक्षण और उनके व्यावहारिक उपयोग के प्रति भी जागरूकता पैदा करते हैं।
पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया
समापन अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य अंकित जायसवाल ने सभी प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त किया और प्रतिभागी विद्यार्थियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के अंत में शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों ने विद्यालय परिसर में औषधीय एवं फलदार पौधों जैसे आंवला, तेजपत्ता, शहतूत, माल्टा, आम और बांज का पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
