
उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में कानून व्यवस्था अब चिंता और चेतावनी बन चुकी है। एक हफ्ते में दो अलग-अलग जिलों से सामने आई गैंगरेप की घटनाओं ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। हालत ये हैं कि अपराधी बेखौफ हैं और पुलिस का डर आज कमजोर नजर आ रहा है। 22 फरवरी को उधम सिंह नगर और 24 फरवरी को नैनीताल जिले में। तारीखें और जिले बदले हैं, लेकिन अपराध का तरीका और हौसले वही थे।
देवर के सामने किया महिला के साथ गैंगरेप
बता दें उधम सिंह नगर के रुद्रपुर क्षेत्र में महिला के साथ उसके ही देवर के सामने हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। पीड़िता ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि देवर के साथ सरस मेले से लौटने के दौरान देवर के दोस्तों ने उसे रास्ते में रोककर अपने साथ ले जाने की बात कही। आरोप है कि सुनसान इलाके में ले जाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया और घटना का वीडियो भी बनाया गया। इस पूरी वारदात में मौजूद देवर ने न तो युवकों का विरोध किया और न ही पीड़िता की मदद की। सवाल यह है कि जब अपराधी खुलेआम ऐसी वारदात को अंजाम दे रहे हैं, तो उन्हें किसका डर नहीं है?
नैनीताल में किशोरी के साथ चलती कार में किया दुष्कर्म
इस घटना के ठीक बाद नैनीताल जिले से भी उतनी ही शर्मनाक खबर सामने आई। हल्द्वानी के काठगोदाम क्षेत्र में 15 साल की नाबालिग किशोरी को उसके ही पडोसी युवकों ने बहला-फुसलाकर कार में बैठाया गया। जंगल किनारे चलती कार में उसे शराब पिलाकर बारी-बारी उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना के बाद दोनों आरोपियों ने किशोरी को उसके घर छोड़ दिया। घर पहुंचते ही किशोरी ने अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी। थाने में तहरीर के कुछ ही घंटों बाद नैनीताल पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ गिरफ्तारी से ऐसे अपराध रुक जाएंगे?
कुमाऊं में अपराधियों के हौसले बुलंद, एक के बाद गैंगरेप की घटना कर रहे पुष्टि
इन दोनों घटनाओं ने कुमाऊं मंडल की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। खास बात यह है कि ये मामले किसी दूर-दराज इलाके के नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों के हैं, जहां पुलिस की मौजूदगी और निगरानी सबसे ज्यादा मानी जाती है। अब सवाल सीधे कुमाऊं रेंज की कमान संभाल रहीं आईजी रिद्धिम अग्रवाल ( IG Riddhim Agarwal) से है कि क्या कुमाऊं में अपराधियों को पुलिस का डर खत्म हो चुका है? क्या कार्रवाई सिर्फ घटनाओं के बाद की औपचारिकता बनकर रह गई है?
