
उत्तराखंड के जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और जन-अधिकारों की रक्षा के लिए अब राज्य के विभिन्न सामाजिक संगठन और जागरूक नागरिक एक मंच पर आ गए हैं। राजधानी देहरादून के हरिद्वार बाईपास स्थित संस्कृति विभाग के ऑडिटोरियम में ‘रचनात्मक कांग्रेस’ और विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय भव्य ‘उत्तराखंड जनसंवाद’ का आयोजन किया गया। दिनभर चले इस मंथन में राज्य की गंभीर चुनौतियों पर तीखी और व्यावहारिक चर्चा हुई, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जनता का एक साझा और मजबूत ‘घोषणा पत्र’ तैयार कर जारी किया जाएगा।
तीन सत्रों में गूंजे उत्तराखंड के मूलभूत सवाल
भू-कानून और जमीन की खरीद-फरोख्त
वरिष्ठ पत्रकार जयसिंह रावत ने कठोर भू-कानून की वकालत करते हुए कहा कि राज्य की सरकारों ने संशोधनों के जरिए उत्तराखंड की कीमती जमीनों को उद्योगपतियों और पूंजीपतियों के हवाले करने का रास्ता साफ किया है। वहीं पत्रकार राहुल कोटियाल ने सरकारी जमीनों की धड़ल्ले से हो रही बिक्री पर गहरी चिंता व्यक्त की।
शहरऔर स्थानीय मार्गदर्शिका
पलायन और अनियोजित शहरीकरण
डॉ. प्रेम बहुखंडी ने कहा कि रोजगार के लिए बाहर जाना गलत नहीं है, लेकिन अपनी जड़ों की ओर लौटना भी उतना ही जरूरी है। विजय भट्ट ने शहरों के अनियंत्रित फैलाव से पैदा हो रहे खतरों से आगाह किया।
पर्यावरण, कुटीर उद्योग और किसाऊ बांध
हिमांशु अरोड़ा ने विकास के नाम पर जंगलों की कटाई पर सवाल उठाए। जगदम्बा मैठाणी ने पहाड़ी कुटीर उद्योगों के सामने खड़ी चुनौतियों को रेखांकित किया। चर्चा के दौरान सूखते नौले-धारों, पर्यावरण के नुकसान, किसाऊ बांध से विस्थापन और स्थानीय लोक कलाकारों की उपेक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा।
सामाजिक न्याय और महिला अधिकार
दीपा कौशलम ने महिलाओं की पारिवारिक निर्णयों में भागीदारी और न्याय व्यवस्था की कमी पर बात की। वरिष्ठ पत्रकार एमएसए काजमी व एडवोकेट रजिया बेग ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों, आरपी विशाल व जबर सिंह ने दलित उत्पीड़न, और अमन गुप्ता ने ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने पर जोर दिया। पत्रकार त्रिलोचन भट्ट ने ऐसे संवेदनशील मामलों में मीडिया की भूमिका को रेखांकित किया। इसके अलावा, अरण्य रंजन ने अनियंत्रित पर्यटन-तीर्थयात्रा प्रबंधन और सरदार तेजिंदर सिंह ने किसानों की अनसुलझी समस्याओं पर अपनी बात रखी।
“सत्ता में आने पर भी सरकार को आइना दिखाएगा यह मंच”
कार्यक्रम के मुख्य आयोजक और रचनात्मक कांग्रेस के मुख्य सारथी संदीप दीक्षित ने संगठन के विजन को स्पष्ट करते हुए कहा, “यह केवल किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि जन-संगठनों और आम जनता का साझा मंच है। अगर भविष्य में कांग्रेस सत्ता में आती भी है, तब भी यह मंच जनता की आवाज बनकर सरकार को आइना दिखाने का काम पूरी निष्पक्षता से करेगा।”
राजनीति
एकजुट होकर निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे जनसंगठन
सभी संगठनों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि उत्तराखंड के मुद्दों पर अब बिखराव के बजाय एकजुट होकर निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी। उत्तराखंड इंसानियत मंच के डॉ. रवि चोपड़ा, उत्तराखंड महिला मंच की निर्मला बिष्ट व विमला कोली, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, प्रसिद्ध समाजसेवी सुरेश भाई, गरिमा दसौनी और सुजाता पॉल समेत कई गणमान्य हस्तियों ने राज्य के विकास और समस्याओं के समाधान के लिए अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए। कार्यक्रम का सफल संचालन रचनात्मक कांग्रेस के प्रदेश सारथी भुवन पाठक ने किया।
