Gurmeet singh chandhok

उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम के बाद कथित तौर पर मंच के ‘शुद्धिकरण’ को लेकर सियासत तेज हो गई है। अब बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए उत्तराखंड सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि खरगे के दलित होने की वजह से उनके कार्यक्रम के बाद मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया गया। उन्होंने इसे बेहद निंदनीय और चिंताजनक बताते हुए सरकार से ऐसे जातिवादी और सामंती तत्वों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई कर उन्हें जेल भेजने की मांग की।
‘बिना देरी किए हो सख्त कार्रवाई’
मायावती ने कहा कि हल्द्वानी की घटना की जानकारी संसद के जरिए देश के सामने आई है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार से मामले को गंभीरता से लेने और दोषियों के खिलाफ बिना किसी देरी के उचित कानूनी कार्रवाई करने को कहा।
यह विवाद उस समय सामने आया जब 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खरगे ने कांग्रेस की एक सभा को संबोधित किया था। इसके कुछ दिनों बाद वहां कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान किया गया। मामले को लेकर संसद में भी खरगे ने सवाल उठाया था।
RSS प्रमुख मोहन भागवत पर भी निशाना
मायावती ने अपने बयान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख को इस घटना पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। साथ ही उन्होंने दलितों के आर्थिक रूप से मजबूत होने के आधार पर आरक्षण से वंचित करने की बहस के संदर्भ में भी सवाल उठाया।
BJP ने घटना से किया किनारा
इस पूरे विवाद पर बीजेपी की ओर से कहा गया है कि पार्टी का कथित ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं है। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने संसद में मामले को गंभीर बताते हुए जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
हल्द्वानी की इस घटना ने जातिगत भेदभाव, सामाजिक समानता और राजनीतिक दलों की विचारधारा को लेकर एक नई सियासी बहस छेड़ दी है। मायावती के बयान के बाद यह मुद्दा उत्तराखंड से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में और ज्यादा गरमाने के आसार हैं।
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