Gurmeet singh chandhok

आज एडीजे कोर्ट, हल्द्वानी में धनंजय गिरी को राहत न मिलने के बाद पीड़ित परिवारों में न्याय मिलने की नई उम्मीद जगी है। पीड़ितों का कहना है कि भले ही उन्हें उनकी मेहनत की कमाई और संपत्तियां वापस मिलने में समय लगे, लेकिन अब उन्हें विश्वास है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होगी तथा इस कथित धोखाधड़ी में शामिल सभी दोषियों की भूमिका सामने आएगी और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि यह मामला केवल धनंजय गिरी तक सीमित नहीं है, बल्कि उन बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए जिनकी कथित मिलीभगत, लापरवाही अथवा संरक्षण के कारण आम लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। उनका कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए तो कई ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं जो इस पूरे प्रकरण की सच्चाई को उजागर करेंगे।
पीड़ितों का कहना है कि पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) पर उत्तराखंड सहित विभिन्न स्थानों पर समय-समय पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। उनका आरोप है कि बैंक के कुछ अधिकारियों की कार्यप्रणाली के कारण बैंक की साख और विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। पीड़ितों का यह भी कहना है कि पूर्व में उत्तराखंड से जुड़े एक मामले में भी पीएनबी को उच्चतम न्यायालय की कड़ी टिप्पणियों और फटकार का सामना करना पड़ा था। उनका मानना है कि जब किसी राष्ट्रीयकृत बैंक से जुड़े मामलों में गंभीर सवाल उठते हैं तो उसका सीधा असर आम जनता के विश्वास पर पड़ता है।
पीड़ित परिवारों ने कहा कि बैंक किसी व्यक्ति विशेष की संपत्ति नहीं, बल्कि देश की जनता की जमा पूंजी और राष्ट्र की आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार हैं। ऐसे में यदि किसी बैंक अधिकारी द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर जनता के धन के साथ खिलवाड़ किया जाता है तो उसके विरुद्ध भी उतनी ही कठोर कार्रवाई होनी चाहिए जितनी किसी अन्य आरोपी के विरुद्ध की जाती है।
पीड़ितों की मांग है कि इस पूरे प्रकरण में बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए तथा यदि किसी अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है तो उसके विरुद्ध भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच से न केवल दोषियों का पर्दाफाश होगा बल्कि भविष्य में इस प्रकार के बड़े आर्थिक अपराधों पर भी अंकुश लगेगा।
पीड़ित परिवारों ने राज्य सरकार, पुलिस प्रशासन तथा जांच एजेंसियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कर दोषियों को कानून के अनुसार दंडित किया जाए, ताकि आम जनता का न्याय व्यवस्था और बैंकिंग प्रणाली पर विश्वास बना रहे।
यह शीर्षक और शुरुआती पैराग्राफ “जमानत खारिज” की जगह “एडीजे कोर्ट से राहत नहीं मिली” के अनुसार संशोधित है।
