
रुद्रपुर: ऊधम सिंह नगर जिले में जमीनों की खरीद-फरोख्त के नाम पर धोखाधड़ी, जालसाजी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामले में थाना रुद्रपुर क्षेत्र के अंतर्गत चर्चित आरोपी प्रिया शर्मा और सुधीर चावला के खिलाफ एक बार फिर शिकंजा कसा है। पीड़ित गुरमीत सिंह पुत्र हरमिन्दर सिंह (निवासी गोविन्दपुरा, हल्द्वानी) की तहरीर पर पुलिस ने दोनों नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(2) और 318(4) के तहत प्राथमिकी (FIR No. 0574/2026) दर्ज कर ली है। इस संगीन मामले की जांच उपनिरीक्षक महेश कांडपाल को सौंपी गई है।
35.14 लाख रुपये देने और रजिस्ट्री के बावजूद नहीं मिला कब्जा
दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, शिकायतकर्ता गुरमीत सिंह ने 7 अक्टूबर 2017 को सुधीर चावला (निवासी एलान्स क्रिस्टल इस्टेट, रुद्रपुर) से ग्राम कोलड़ा, तहसील रुद्रपुर स्थित खसरा संख्या 226/मि0/3 का 9122.5 वर्ग फीट का भूखंड 35,14,000 रुपये में खरीदा था। इसका पूरा भुगतान आरटीजीएस और चेक के माध्यम से विभिन्न तिथियों में किया गया था। उपनिबंधक कार्यालय रुद्रपुर में दस्तावेज पंजीकृत कराते हुए 1,76,000 रुपये स्टाम्प शुल्क और 25,200 रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क भी जमा किया गया था। इसके बावजूद आरोपियों ने जमीन का कब्जा नहीं दिया।
रेरा से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक खारिज हुई याचिकाएं
पीड़ित ने जब कब्जा न मिलने पर रेरा (RERA) प्राधिकरण देहरादून का रुख किया, तो 6 जुलाई 2023 को प्राधिकरण ने आरोपियों को कब्जा सौंपने का आदेश दिया। इस आदेश के खिलाफ प्रिया शर्मा ने रेरा अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील की, जो 16 मार्च 2025 को खारिज कर दी गई। इसके बाद रेरा के निष्पादन आदेश (26 फरवरी 2026) पर भी जब अमल नहीं हुआ, तो प्रिया शर्मा ने सिविल जज सीनियर डिवीजन से लेकर उत्तराखंड उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) तक रजिस्ट्री निरस्त कराने के लिए याचिकाएं दायर कीं, लेकिन हर जगह से उनकी याचिकाएं खारिज कर दी गईं। न्यायालयों से राहत न मिलने पर आरोपियों ने साजिश के तहत उक्त जमीन पर किसी अन्य व्यक्ति को बैठाकर अवैध निर्माण करवा दिया।
प्रिया शर्मा का लंबा आपराधिक इतिहास और अन्य गंभीर मामले
रुद्रपुर थाने में दर्ज ताजा FIR कोई इकलौता मामला नहीं है, बल्कि आरोपी प्रिया शर्मा (एलाइड इन्फ्रा/एलाइड प्लस इन्फ्रा की प्रबंध निदेशक) का आपराधिक इतिहास काफी लंबा रहा है। उनके खिलाफ जिले के विभिन्न थानों, अदालतों और केंद्रीय जांच एजेंसियों के स्तर पर कई मुकदमे दर्ज हैं:
चर्चित एनएच-74 (NH-74) भूमि मुआवजा घोटाला:
ऊधम सिंह नगर जिले में एनएच-74 फोरलेन हाईवे के चौड़ीकरण के दौरान कृषि भूमि को अकृषि दिखाकर करोड़ों रुपये का फर्जी मुआवजा हड़पने के सबसे बड़े घोटाले में प्रिया शर्मा मुख्य आरोपियों में शामिल थीं। इस मामले में एसआईटी (SIT) द्वारा गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए थे, जिसके तहत उन्हें गुरुग्राम (हरियाणा) से गिरफ्तार किया गया था और वह लगभग एक वर्ष तक जेल में भी रह चुकी हैं। हालांकि बाद में उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय से उन्हें जमानत मिल गई थी।
फर्जी दस्तावेज और अवैध सरकारी कनेक्शन का आरोप:
प्रिया शर्मा के खिलाफ पूर्व में भी कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन हड़पने तथा फर्जी कागजात के आधार पर सरकारी बिजली का मीटर प्राप्त करने से संबंधित मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई है। इन आरोपों से जुड़े मामले विभिन्न थानों में दर्ज हैं। संबंधित मामलों में तकरीबन 1 साल जेल रहने के बाद हाइकोर्ट ओर सुप्रीम कोर्ट से जमानत में बाहर है ऐसे में संबंधित जांच एजेंसियों से अपेक्षा है कि वे सभी दर्ज मुकदमों, दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों को सार्वजनिक करें, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
सरकारी काम में बाधा और केंद्रीय जांच एजेंसियों के शिकंजे:
विभिन्न घोटालों और मामलों में उनके खिलाफ केवल स्थानीय पुलिस ही नहीं, बल्कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), सीबीआई (CBI) तथा आयकर विभाग (IT Department) की करोड़ों की देनदारी है। जांच एजेंसियों द्वारा इनके बैंक खाते भी फ्रीज किए गए थे। इनका हौसला इतना बुलंद है कि हाइकोर्ट ओर सुप्रीम कोर्ट से बेल के बाद सरकारी काम में बाधा डालने के जुड़े मामले भी दर्ज हुए हैं।
लक्जरी गाड़ियां, कुमाऊं का सबसे आलीशान कार्यालय और जांच एजेंसियों की चुप्पी पर सवाल
एक तरफ जहां प्रिया शर्मा पर गंभीर आपराधिक मुकदमे, धोखाधड़ी और सरकारी आयकर विभाग की देनदारी के बाद भी कार्य में बाधा डालने जैसे आरोप दर्ज हैं, वहीं दूसरी ओर उनका रसूख और रहन-सहन चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा है कि इन तमाम कानूनी शिकंजों के बावजूद वह पचास-पचास लाख रुपये की लग्जरी गाड़ियों में घूमती हैं। रुद्रपुर के गाबा चौक पर स्थित इनका कार्यालय कुमाऊं क्षेत्र का सबसे आलीशान और भव्य कार्यालय बताया जाता है, जिसकी बनावट और साज-सज्जा क्षेत्र में चर्चा का केंद्र है।
सूत्रों और आम चर्चा के अनुसार, यदि इनके व्यवसाय का मासिक खर्च जोड़ा जाए, तो वह लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये बैठता है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने संगीन मुकदमों और कानूनी कार्रवाई के घेरे में होने के बावजूद इनके पास यह अरबों रुपये की संपत्ति और आय का स्रोत प्रिया शर्मा के पास कहां से आ रहा है? क्या इस दिशा में कोई भी सरकारी या वित्तीय जांच एजेंसी यह छानबीन नहीं कर रही है कि इस अकूत संपत्ति के पीछे का सच क्या है? पुलिस अब ताजा मामले में मुकदमा दर्ज कर इन सभी पहलुओं और नेटवर्क की गहराई से जांच करने की तैयारी में जुटी है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके द्वारा जो एसएसपी को शिकायत पत्र दिया गया था उसके बाद उनमें एक उम्मीद जगी है और ऐसा अपराधियों के ऊपर उनके द्वारा लगाम लगाने का कार्य किया जा रहा है
