
उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित विश्व प्रसिद्ध धामों के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सर्दियों के मौसम में भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के चलते हर साल की तरह इस बार भी परंपरा और पंचांग गणना के अनुसार कपाट बंद करने की तिथियां घोषित कर दी गई हैं। इसके साथ ही देवी-देवताओं की उत्सव डोलियां अपने शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना होने लगी हैं, जहां अगले छह महीने तक श्रद्धालु उनके दर्शन कर सकेंगे।
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16 नवंबर को बंद होंगे श्री बदरीनाथ धाम के कपाट
भू-बैकुंठ श्री बदरीनाथ धाम के कपाट आगामी 16 नवंबर 2026 को रात 9 बजकर 37 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। विजयदशमी के पावन पर्व पर शुभ मुहूर्त में कपाट बंद होने की तिथि घोषित की गई।
कपाट बंद होने के साथ ही बदरीनाथ धाम की यात्रा का इस वर्ष का समापन हो जाएगा। इसके बाद शीतकाल में भगवान बदरी विशाल की पूजा-अर्चना परंपरानुसार निर्धारित शीतकालीन पूजा स्थलों पर संपन्न होगी। कपाट बंद होने की तिथि घोषित होने के साथ ही धाम में शीतकालीन यात्रा की तैयारियों और धार्मिक परंपराओं को लेकर श्रद्धालुओं की उत्सुकता बढ़ गई है।
गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर को होंगे बंद
विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम के कपाट इस वर्ष 10 नवंबर को अन्नकूट पर्व पर विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। रामनवमी के शुभ अवसर पर गंगोत्री मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार कपाटबंदी का मुहूर्त निकाला। समिति के अध्यक्ष धर्मानंद सेमवाल और सचिव सुरेश सेमवाल ने जानकारी दी कि 10 नवंबर को अमृत बेला में अभिजीत मुहूर्त पर दोपहर 12 बजकर 5 मिनट पर गंगोत्री धाम के कपाट बंद होंगे। कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की उत्सव डोली पारंपरिक जलसे के साथ मुखबा स्थित गंगा मंदिर के लिए प्रस्थान करेगी। शीतकाल के दौरान अगले छह महीने तक मां गंगा की पूजा-अर्चना और दर्शन उनके शीतकालीन प्रवास मुखबा (मुखीमठ) में ही होंगे।
द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम के कपाट 16 नवंबर को होंगे बंद
भगवान शिव के पंचकेदारों में द्वितीय केदार के रूप में विख्यात मद्महेश्वर धाम के कपाट आगामी 16 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद भगवान की चल विग्रह डोली शीतकालीन गद्दीस्थल के लिए रवाना होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 16 नवंबर को कपाट बंद होने के बाद डोली का पहला रात्रि विश्राम गौंडार गांव में होगा। 17 नवंबर को डोली गौंडार से प्रस्थान कर रांसी पहुंचेगी। 18 नवंबर को डोली रांसी से गिरिया के लिए रवाना होगी। 19 नवंबर को डोली गिरिया से चलकर अपने शीतकालीन प्रवास ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचेगी। यहीं अगले छह महीने तक भगवान मद्महेश्वर की नियमित शीतकालीन पूजा-अर्चना संपन्न होगी।
तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट 6 नवंबर को बंद होंगे
विजयदशमी के पावन पर्व पर पंचांग गणना के बाद तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि भी तय कर दी गई है। आगामी 6 नवंबर को भगवान तुंगनाथ के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए शीतकाल हेतु बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद उत्सव विग्रह डोली विभिन्न पड़ावों से होते हुए शीतकालीन गद्दीस्थल पहुंचेगी। 6 नवंबर को कपाट बंद होने के बाद डोली रात्रि प्रवास के लिए चोपता पहुंचेगी। 7 नवंबर को डोली भनकुन पहुंचेगी। 8 नवंबर को डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल मर्कटेश्वर मंदिर, मक्कूमठ में विराजमान होगी, जहां शीतकाल में भगवान तुंगनाथ की पूजा होगी।
चतुर्थ केदार रुद्रनाथ धाम की डोली पहुंची गोपेश्वर
चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ धाम के कपाट गत 17 अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे। कपाट बंद होने से पहले विशेष पूजा, अभिषेक और रुद्री पाठ किया गया था। इसके बाद उत्सव डोली ने देवलधार गांव स्थित ज्वाला माता मंदिर में रात्रि विश्राम करते हुए अपनी यात्रा पूरी की। सोमवार, 19 अक्टूबर को भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल गोपेश्वर स्थित ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर पहुंची। डोली के पहुंचते ही पूरा मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों और शंखध्वनि से गूंज उठा। हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद लिया। अब अगले छह महीने तक श्रद्धालु गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में ही भगवान रुद्रनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे
