Gurmeet singh chandhok

उत्तराखंड में विशेष जरूरतों वाले बच्चों की पहचान और उनकी पढ़ाई-लिखाई को बेहतर बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। राज्य में पहली बार Specific Learning Disability (विशेष सीखने संबंधी कठिनाई) और Autism (ऑटिज्म) से प्रभावित बच्चों की पहचान के लिए राज्य स्तरीय मैपिंग अभियान शुरू किया गया है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने देहरादून के झाझरा स्थित आईटीआई दून संस्कृति स्कूल में इस प्रदेश स्तरीय मैपिंग कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इन बच्चों की पहचान कर उन्हें उनकी जरूरत के अनुसार सही शिक्षा, मार्गदर्शन और विकास के नए अवसर देना है। पर्यटकोंके घूमने-फ़िरने की जगहें
हर बच्चा खास है: प्रतिभा को पहचानने की पहल
इस पहल का मूल संदेश है कि हर बच्चे की सीखने की क्षमता और तरीका अलग होता है। किसी बच्चे को पढ़ने में दिक्कत हो सकती है, तो किसी को लिखने या गणित के हिसाब-किताब में परेशानी आ सकती है। वहीं ऑटिज्म से प्रभावित बच्चे सामाजिक संवाद में अलग प्रतिक्रिया दे सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बातों को बच्चे की कमजोरी मानने के बजाय उनकी असली क्षमता को पहचानना जरूरी है। केवल परीक्षा के अंकों से बच्चे की योग्यता तय नहीं की जा सकती। इस अभियान के तहत शिक्षकों को खास प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे क्लासरूम में ही बच्चों की समस्याओं को समझ सकें और अभिभावकों के साथ मिलकर उन्हें सही मार्गदर्शन दे सकें। इस मुहिम का सीधा संदेश है— “पहचान होगी, सहायता होगी, शिक्षा होगी और हर बच्चे का सम्मान होगा।”
झाझरा स्कूल में बच्चों से मिले केंद्रीय राज्य मंत्री
झाझरा के आईटीआई दून संस्कृति स्कूल पहुंचे अठावले ने विद्यार्थियों से बातचीत की और शैक्षणिक सुविधाओं का जायजा लिया। 13 एकड़ में फैले इस संस्थान में पूर्वोत्तर भारत के लगभग 150 विद्यार्थी और 67 दिव्यांग बच्चे एक साथ पढ़ाई कर रहे हैं। समारोह में प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री खजान दास पूर्व सांसद तरुण विजय भी मौजूद रहे। अठावले ने कहा कि दिव्यांगजन शरीर से भले कमजोर लगें, लेकिन वे दिल और दिमाग से बेहद मजबूत होते हैं। उन्होंने पैरालंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों द्वारा जीते गए स्वर्ण और अन्य पदकों का उदाहरण देते हुए कहा कि दिव्यांगता किसी की प्रतिभा में बाधा नहीं बन सकती। उन्होंने परिसर में अतिरिक्त सुविधाओं और शिक्षकों के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय से अनुदान दिलाने का आश्वासन दिया।अठावले ने बताया कि 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 2.68 करोड़ से अधिक दिव्यांगजन हैं। केंद्र सरकार ने दिव्यांगजनों से संबंधित योजनाओं के लिए सरकार ने लगभग 950 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। राज्य और केंद्र का ध्यान इस बात पर है कि हर बच्चे को उसकी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का मौका मिले।
मुख्यमंत्री धामी की तारीफ और जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा
अठावले ने उत्तराखंड के समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की तारीफ करते हुए कहा कि सीएम धामी उनके अच्छे मित्र हैं और उनके नेतृत्व में राज्य में विकास के बेहतरीन काम हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में 59.30 करोड़ से अधिक जनधनखाते खुले हैं, जिनमें उत्तराखंड में लगभग 40.91 लाख खाते शामिल हैं। मुद्रा योजना में देश भर में 60.27 करोड़ ऋण मंजूर किए गए, जिनमें से राज्य के 36.87 लाख लोगों को लाभ मिला।उज्ज्वला योजना में उत्तराखंड के 5.05 लाख परिवारों को एलपीजी कनेक्शन मिले। पीएम आवास योजना (शहरी) में राज्य में लगभग 43,000 पक्के मकान बनाए गए हैं। राज्य में 56.73 लाख एलईडी बल्ब बांटे गए हैं और नशा मुक्ति अभियानों तथा 4 वृद्धाश्रमों को सहायता प्रदान की जा रही है।
