Gurmeet singh chandhok
रुड़की में 6 साल की बच्ची और मां के साथ चलती कार में हैवानियत के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला। पांचों दोषियों को उम्रकैद की सजा और 15.20 लाख रुपये का जुर्माना। पीड़िता को मिलेगा 11 लाख का मुआवजा। पूरी खबर पढ़ें
Roorkee: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में स्थित फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (रुड़की) ने मानवता को शर्मसार करने वाले एक अति संवेदनशील मामले में मिसाल कायम करने वाला ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
अपर सत्र न्यायाधीश रमेश सिंह की अदालत ने करीब चार साल पुराने इस दर्दनाक मामले में सुनवाई करते हुए सभी पांचों मुख्य आरोपियों को दोषी पाया है। न्याय के मंदिर से कड़ा संदेश देते हुए कोर्ट ने सभी पांचों दरिंदों को अंतिम सांस तक जेल में रहने यानी उम्रकैद की सजा सुनाई है।
छल से दी लिफ्ट, फिर चलती कार में दिखाई हैवानियत
यह खौफनाक वारदात जून 2022 की है, जब एक पीड़ित महिला अपनी छह वर्ष की मासूम बच्ची के साथ पिरान कलियर से वापस लौट रही थी। मुख्य आरोपी महक सिंह उर्फ सोनू ने उन्हें मदद का झांसा देकर रुड़की तक छोड़ने के बहाने कार में लिफ्ट दी थी।
लेकिन सफर के दौरान ही मुख्य आरोपी और उसके साथियों की नीयत बिगड़ गई। पांचों दरिंदों ने चलती कार के भीतर मासूम बच्ची और उसकी मां के साथ भयानक ज्यादती की और बाद में उन्हें गंगनहर के पास बेसुध हालत में फेंककर फरार हो गए।
15 लाख का जुर्माना और पीड़ितों को मुआवजा
अदालत ने मासूम बच्ची को पहुंची गहरी शारीरिक व मानसिक चोट को ध्यान में रखते हुए दोषियों पर संयुक्त रूप से 15 लाख 20 हजार रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। सजा पाने वालों में महक सिंह उर्फ सोनू, राजीव उर्फ विक्की तोमर, सुबोध, गोलू तेजीयान और जगदीश लाल शामिल हैं। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि जुर्माने की इस कुल राशि में से पीड़ित बच्ची को 11 लाख रुपये और उसकी मां को 2 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा, ताकि उनके पुनर्वास में मदद हो सके।
