हल्द्वानी। शहर में अग्नि सुरक्षा मानकों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बड़े अग्निकांडों की घटनाओं के बावजूद अस्पतालों में फायर सेफ्टी नियमों के पालन को लेकर जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। आरोप है कि जिलाधिकारी द्वारा अस्पतालों के फायर सेफ्टी ऑडिट के दिए गए निर्देश केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं और जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।
ताजा मामला नवाबी रोड स्थित दृष्टि सेंटर फॉर एडवांस आई केयर से जुड़ा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अस्पताल बिना आवश्यक फायर एनओसी और अन्य अनिवार्य अनुमतियों के संचालित किया जा रहा है। इस संबंध में सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिससे मामला चर्चा का विषय बन गया है।


सीएम हेल्पलाइन में दर्ज हुई शिकायत
वार्ड-11 निवासी एवं पार्षद रवि जोशी ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत संख्या CMHL 052026-11-1035327 (दिनांक 21 मई 2026) में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल अग्निशमन विभाग और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) की आवश्यक एनओसी के बिना संचालित हो रहा है। शिकायत में भवन के ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग व्यवस्था न होने का मुद्दा भी उठाया गया है।
जांच में क्या मिला
शिकायत के बाद संबंधित विभाग द्वारा अस्पताल का निरीक्षण किया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार संस्थान ने फायर विभाग के पोर्टल पर प्री-ऑपरेशनल फायर एनओसी के लिए आवेदन किया है। आवेदन संख्या 95396937 दिनांक 8 मई 2026 दर्ज है।
निरीक्षण के दौरान भवन में आवश्यक अग्निशमन उपकरण स्थापित पाए गए। अधिकारियों ने यह भी बताया कि ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग की व्यवस्था मौजूद है, लेकिन निर्माण कार्य जारी होने के कारण वहां निर्माण सामग्री रखी हुई मिली। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद पार्किंग स्थल को पूरी तरह खाली कर दिया जाएगा।
प्रशासन ने दिए निर्देश
निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देशित किया है कि पूर्ण फायर एनओसी प्राप्त होने और पार्किंग व्यवस्था सुचारु किए जाने के बाद ही संस्थान का व्यावसायिक संचालन शुरू किया जाए।
फायर विभाग की भूमिका पर भी सवाल
इस पूरे मामले में अग्निशमन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना एनओसी अस्पताल संचालन जैसे गंभीर मामलों में विभाग स्पष्ट कार्रवाई करने के बजाय जिम्मेदारी अन्य प्रशासनिक इकाइयों पर डाल रहा है।
हालिया अग्निकांड के बाद बढ़ी चिंता
हाल ही में रामपुर रोड पर हुए भीषण अग्निकांड में दो लोगों की मौत के बाद जिले की आपदा एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था पर भी सवाल उठे थे। आरोप है कि कई घटनाओं की सूचना समय पर जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र तक नहीं पहुंच पाती, जिससे राहत और बचाव कार्य प्रभावित होते हैं।
अस्पताल संचालन के लिए जरूरी हैं ये अनुमतियां
नियमों के अनुसार किसी भी अस्पताल के संचालन के लिए फायर एनओसी के अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति, बायो-मेडिकल वेस्ट निस्तारण की व्यवस्था, भवन का कंप्लीशन अथवा ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और आवश्यक ड्रग लाइसेंस समेत कई मानकों का पालन अनिवार्य होता है।
फिलहाल यह मामला अस्पतालों में सुरक्षा मानकों के अनुपालन और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर बहस का विषय बना हुआ है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नियमों का समान रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए, जबकि प्रशासन की ओर से बताया गया है कि मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। सिटी मजिस्ट्रेट ने सोमवार तक इस संबंध में कार्रवाई का भरोसा दिया है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में इससे पहले भी अस्पतालों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आग लगने की कई गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हाल ही में देहरादून के एक अस्पताल में हुए अग्निकांड में एक मरीज की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि दिल्ली और हल्द्वानी में भी आग की बड़ी घटनाएं सामने आई थीं, जिनमें जनहानि और भारी नुकसान हुआ। इन घटनाओं के बावजूद यदि अस्पतालों और अन्य संवेदनशील संस्थानों में फायर सेफ्टी मानकों का अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है, तो यह शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार हादसों से सबक लेने के बजाय जिम्मेदार विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार करते नजर आ रहे हैं। ऐसे में बिना पूर्ण फायर एनओसी और अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों के संस्थानों का संचालन सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है
