Gurmeet singh chandhok
रुद्रप्रयाग: केदारनाथ मार्ग को प्रदूषित कर रही घोड़े खच्चर के लीद को लेकर पर्यटन विभाग ने तमाम दावे किए कि इस लीद को चीड़ के पिरूल के साथ मिलाकर फायर ब्रिक्स बनाए जाएंगे और उससे पानी गर्म करने के बॉयलर जलेंगे तीर्थ यात्रियों को गर्म पानी मिला करेगा।
पर्यटन विभाग ने कैबिनेट से पास करवा कर एक पायलट प्रोजेक्ट 3 फरवरी 2026 को हिमालय इंस्टीट्यूट फॉर इनवायरमेंट इकोलॉजी एंड डेवलपमेंट संस्था को 1 करोड़ 43 लाख 61 हजार रु में दे दिया। जोर शोर से इस प्रोजेक्ट का प्रचार प्रसार किया गया। लेकिन फरवरी से मई का महीना बीत गया और प्रोजेक्ट का बॉयलर केदारधाम की नगरी में नहीं पहुंचा।
नहीं उठाई जा रही लीद
नतीजा ये हुआ कि घोड़े खच्चर की लीद यात्रा मार्ग से उठाई नहीं गई और ये गंदगी श्रद्धालुओं के पैरों में लगती रही और बारिश के साथ मिलती हुई मंदाकिनी गंगा में मिल रही है। बताया जाता है कि इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए कुछ बजट जारी भी कर दिया गया है।
पहले पतंजलि उठाता था मुफ़्त में
ऐसा जानकारी में आया है कि पिछले साल जिला प्रशासन के आग्रह पर पतंजलि योग पीठ द्वारा यात्रा मार्ग से लीद उठाई जा रही थी और इसके निस्तारण के लिए उनके द्वारा केदारनगरी में एक केंद्र भी स्थापित किया गया था। जिसमें उनके द्वारा करीब 50 लाख से ज्यादा का खर्चा भवन निर्माण आदि में किया गया। पतंजलि द्वारा ये कार्य एक सेवा के रूप में किया और सरकार से एक रु की मदद भी नहीं ली गई थी।
पशुपालन अधिकारी ने पतंजलि पर लगा दिया था रोक
इस बारे में उनका प्रोजेक्ट आगे बढ़ता उससे पहले ही 10 अप्रैल 2026 को रुद्रप्रयाग के जिला पशुपालन अधिकारी आशीष रावत ने उनके प्रोजेक्ट पर काम न करने के तीखे आरोप लगाते हुए नोटिस जारी कर दिया। उल्लेखनीय है कि उक्त काम को फरवरी में ही बिना उनको सूचित किए हिमालय इंस्टीट्यूट फॉर इन्वायरमेंट को दे दिया गया था।
पतंजलि ने भी जिला प्रशासन को भेजा कानूनी नोटिस
इस पर पतंजलि योगपीठ द्वारा पशुपालन विभाग और जिला प्रशासन को लीगल नोटिस भेजा है और अपने द्वारा खर्च किए हुए काम का हर्जाना मांगा है। बताया जाता है कि लीगल नोटिस से शासन प्रशासन अब असहज की स्थिति में है। जिस संस्थान को पर्यटन विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट दिया है उसको लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं कि उक्त संस्था कब बनी, किसने बनाई उसके कर्ताधर्ता कौन हैं? आनन फानन में उसे कैबिनेट ने क्यों लाया? अब तक इस पर काम शुरू क्यों नहीं हुआ?
यानि जिस गंदगी को निशुल्क उठाने और उसके निस्तारण का काम पतंजलि योगपीठ ने किया अब पर्यटन विभाग ने एक करोड़ चालीस लाख से ज्यादा की रकम कैबिनेट ने जारी करवा दी और लीद फिर भी नहीं उठी। इस बारे में डीएम रुद्रप्रयाग विशाल मिश्रा से जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि लीद निस्तारण प्रोजेक्ट में कार्रवाई गतिमान है, जिस संस्था को ये प्रोजेक्ट दिया गया वो अभी केदारनाथ क्षेत्र में बॉयलर लगाने के लिए प्रयासरत है।
गंगा प्रदूषण का खतरा
केदारनाथ मार्ग पर करीब चार हजार घोड़े खच्चर चक्कर लगा रहे है, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ( एनजीटी )ने इस पर उत्तराखंड सरकार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कई बार पत्र लिखा है कि घोड़े खच्चर की लीद से मंदाकिनी गंगा प्रदूषित हो रही है इससे जलीय जीवो को खतरा हो रहा है साथ ही पानी की शुद्धता पर भी असर पड़ रहा है।
