



रिपोर्टर महेन्द्र सिंह बिष्ट
उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप ने राज्य आंदोलनकारियों से नए आंदोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है ।
वह आज कचहरी स्थित शहीद स्मारक में राज्य आंदोलनकारी की बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस बैठक के बाद जिलाधिकारी आदेश चौहान के पास धीरेंद्र प्रताप,उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष जगमोहन नेगी और अन्य आंदोलनकारी गए और उनसे आंदोलन काररियो के चिन्हिकरण में ब बरती जा राही शिथिलता और आंदोलनकारी को 10 पीसदी आरक्षण से मिलने वाले लाभ में उनके बच्चों को मिलने जा रही नौकरियों में की जा रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की। गई इस सभा की अध्यक्षता आंदोलनकारी सुलोचना भट ने की । इसमें राज्य आंदोलनकारी ललित भद्री, श्सत्या पोखरियाल समेत अनेक नेताओं ने आंदोलनकारियों को संबोधित किया ।
धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि एक बार फिर से आंदोलनकारी को समय दान करने का समय आ गया है क्योंकि इस महीने आंदोलनकारी के चिन्हिकरण की मुख्य मंत्री द्वारा दी गई 6 महीने कीसमय सीमा खत्म हो रही है ।
उन्होंने मुख्यमंत्री से आंदोलनकारी के चिन्हिकरण की अवधि 6 महीना और बढाने की मांग की।
उन्होंने आंदोलनकारी के बच्चों की नौकरी में हो हिलाहवाली पर सरकार पर कड़े प्रहार कियेे। और कहा कि सब तरफ भ्रष्टाचार हो रहा है दुनिया भर के काम हो रहे लेकिन आंदोलनकारी से मिलने का मुख्यमंत्री के पास समय नहीं है ।
उन्होंने मुख्यमंत्री को आंदोलनकारी विरोधी करार दिया इससे पहले आंदोलनकारी ने राज्य सरकार के विरुद्ध नाराजगी व्यक्त की और जल्द से जल्द आंदोलनकारी के बच्चों को नौकरी पर लिए जाने की मांग की जगमोहन नेगी ने अपने भाषण में कहा कि नए जिला अधिकारी से उम्मीदें हैं और उन्होंने पौड़ी और उत्तरकाशी में अच्छा काम किया है तो उन्हें हम लोग समय देंगे लेकिन यदि 15 दिन बाद भी कोई कार्रवाई न हुई और शासन ने जिस तरह से हमें धोखा दिया है वादा करके तो जून के तीसरे सप्ताह में राज्य जानकारी मुख्यमंत्री का घेेराव करने को मजबूर होंगे । नवनियुक्त जिला अधिकारी ने धीरेंद्र प्रताप और जगमोहन नेगी की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और विश्वास दिलाया कि जो लोग नौकरी से छूट गए हैं और उसमें जो भी प्रशासनिक कार्रवाई होनी है उसे पर वे तुरंत ध्यान देंगे लेकिन चीनी कारण के लिए उन्होंने कहा कि वह समय अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजेंगे और निश्चित तौर पर जिलाधिकारी को नए सरकारी आदेश का इंतजार करना होगा।
