Gurmeet singh chandhok
चमोली: उत्तराखंड के पवित्र धाम बद्रीनाथ मंदिर में एक ऐसी घटना सामने आई जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। पांच साल से लापता युवक, जिसे उसका परिवार मृत मान चुका था, अचानक जीवित मिल गया। इस भावुक घटना ने न केवल परिवार बल्कि वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।
Missing for 5 Years Rajasthan, Youth Found Alive in Badrinath
पुलिस को सूचना मिली कि माणा गांव के ऊपर बर्फीले और खतरनाक रास्तों की ओर एक विक्षिप्त सा दिखने वाला व्यक्ति जा रहा है। किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए पुलिस तुरंत सक्रिय हुई और उस व्यक्ति को सुरक्षित थाने ले आई। थाने लाए जाने के बाद युवक अपनी पहचान स्पष्ट रूप से बताने की स्थिति में नहीं था। पुलिस और अभिसूचना इकाई की टीम ने धैर्यपूर्वक और मनोवैज्ञानिक तरीके से उससे बातचीत की। इस दौरान “राजस्थान” शब्द सामने आया, जिससे जांच को दिशा मिली और पुलिस ने आगे की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं।
पांच साल बाद परिवार तक पहुंची सूचना
पुलिस की लगातार कोशिशों के बाद युवक के परिजनों का पता राजस्थान में लगाया गया। जब परिवार को फोन कर बताया गया कि उनका बेटा जीवित है और बद्रीनाथ में सुरक्षित है, तो उन्हें पहले विश्वास ही नहीं हुआ क्योंकि वे उसे पांच साल पहले ही मृत मान चुके थे। परिजनों के बद्रीनाथ पहुंचने तक पुलिस ने युवक की पूरी जिम्मेदारी निभाई। उसे नहलाया-धुलाया गया, उसके बाल और दाढ़ी कटवाए गए और उसका हुलिया सुधारा गया। पुलिसकर्मियों ने अपने निजी खर्च से उसके लिए नए कपड़े खरीदे और उसका स्वास्थ्य परीक्षण भी करवाया। इसके अलावा, उसे भगवान के दर्शन कराने के लिए बद्रीनाथ मंदिर ले जाया गया, ताकि उसकी नई जिंदगी की शुरुआत शुभ हो सके। आगे पढ़िए..
माता-पिता से मिलन का भावुक पल
जब राजस्थान से माता-पिता बद्रीनाथ पहुंचे और उन्होंने अपने बेटे को जीवित देखा, तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। पांच साल बाद हुआ यह मिलन इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। माता-पिता अपने बेटे को गले लगाकर फूट-फूट कर रो पड़े। परिजनों ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। वे अपने बेटे को लेने के लिए ₹5000 उधार लेकर बद्रीनाथ पहुंचे थे। इस दौरान उनके पास वापस घर लौटने के लिए भी पैसे नहीं बचे थे।
पुलिस ने कराई सुरक्षित घर वापसी
थानाध्यक्ष नवनीत भंडारी ने इस स्थिति को देखते हुए तुरंत कदम उठाया। पुलिस टीम ने आपसी सहयोग और ट्रस्ट की मदद से धनराशि एकत्रित की और परिवार को दी, ताकि वे सुरक्षित अपने घर राजस्थान लौट सकें।
यह पूरी घटना न केवल एक परिवार के लिए चमत्कार साबित हुई, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई। उत्तराखंड पुलिस ने जिस संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य किया, वह दिखाता है कि आज भी इंसानियत और सेवा की भावना जिंदा है।
