
उत्तराखंड की सियासत में महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। जहां एक तरफ धामी सरकार 28 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को लेकर निंदा प्रस्ताव पारित करने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
महिला आरक्षण को लेकर राजनीति कर रही सरकार: कांग्रेस
कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार महिला आरक्षण जैसे गंभीर मुद्दे पर भी राजनीति कर रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि साल 2023 में महिला आरक्षण से जुड़ा बिल पहले ही सदन में पास हो चुका है, ऐसे में उसे दोबारा लाने का क्या औचित्य है। इसी मुद्दे को लेकर आज देहरादून में विधानसभा के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया।
28 अप्रैल को सड़क से लेकर सदन तक सरकार को घेरेगा विपक्ष
बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं ने भी इस धरने में हिस्सा लिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस के कहना है कि वो महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि उसकी मांग है कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना चाहती है, तो इसे सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव से लागू किया जाए, न कि सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठाया जाए। कांग्रेस ने यह भी साफ कर दिया है कि 28 अप्रैल को होने वाले विशेष सत्र के दौरान सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
