Gurmeet singh chandhok

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक गिरने पर दुख जताया है। सीएम ने कहा नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे ऐतिहासिक संविधान संशोधन को कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने मिलकर रोक दिया।
कांग्रेस ने एक बार फिर छीना महिलाओं का हक़: CM
सीएम धामी ने कहा महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले बिल का विरोध करना ही नहीं, बल्कि उसका मज़ाक उड़ाना और जश्न मनाना, यह केवल राजनीति नहीं, नारीशक्ति का अपमान है। सीएम ने आगे कहा कि देश की बेटियों, बहनों और माताओं का जो हक था, उसे फिर एक बार छीन लिया गया।
कांग्रेस ने एक बार फिर छीना महिलाओं का हक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा यह पहली बार नहीं है कांग्रेस और उसके सहयोगी पहले भी महिलाओं के अधिकारों के रास्ते में अवरोध बनते रहे हैं। 2029 ही नहीं, हर चुनाव में, हर स्तर पर, हर जगह विपक्ष को इस शर्मनाक कृत्य की क़ीमत चुकानी पड़ेगी।
देश की बहनों के लिए निराशाजनक है 17 अप्रैल का दिन
वहीं प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि 17 अप्रैल 2026 देश की बहनों और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए अत्यंत निराशाजनक दिन के रूप में दर्ज हुआ। कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने एक बार फिर अपने आचरण से यह स्पष्ट कर दिया कि वे महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाने के इच्छुक नहीं हैं।
विपक्ष ने दिया राजनीतिक हठधर्मिता का परिचय
भट्ट ने आगे कहा कि पीएम मोदी और गृहमंत्री द्वारा सभी शंकाओं का तथ्यपूर्ण निराकरण करने के बावजूद, विपक्ष ने राजनीतिक हठधर्मिता का परिचय दिया। यह केवल असहमति नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण विधायी पहल को बाधित करने का सोचा-समझा प्रयास प्रतीत होता है।
देश की करोड़ों बहनों की अपेक्षाओं को पहुंचा आघात
भट्ट ने कहा आज केवल एक विधेयक बाधित नहीं हुआ, बल्कि देश की करोड़ों बहनों की अपेक्षाओं को आघात पहुंचा है। जिस समय महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण को और मजबूत करने की आवश्यकता थी, उस समय कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने संकीर्ण राजनीति को प्राथमिकता दी।
महिलाओं के अधिकारों के लिए गंभीर नहीं हैं कांग्रेस: भट्ट
कांग्रेस यह रुख न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वे महिलाओं के अधिकारों और अवसरों के विस्तार को लेकर गंभीर नहीं हैं। लोकतंत्र में स्वस्थ बहस आवश्यक है, लेकिन जनहित के विषयों पर इस प्रकार का अवरोध न तो उचित है और न ही स्वीकार्य। देश की जागरूक बहनें विपक्ष का व्यवहार को भलीभांति समझ रही हैं और लोकतांत्रिक तरीके से उत्तर अवश्य देंगी।
राजनीति की भेंट चढ़ा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’: खंडूरी
वहीं विधानसभा अध्यक्ष ऋतू खंडूरी ने कहा कि आज लोकतंत्र के मंदिर लोकसभा में जो हुआ, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। देश की माताओं और बहनों को उनके अधिकारों के अनुरूप 33% आरक्षण प्रदान करने के लिए लाए गए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ जैसे ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक को कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक और समाजवादी पार्टी द्वारा मिलकर गिराया जाना नारी शक्ति का स्पष्ट अपमान है।
खंडूरी ने कहा यह विधेयक केवल एक कानून नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को सशक्त बनाने का संकल्प था। महिलाओं को उनका हक देने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम होता, जिसे दुर्भाग्यवश राजनीति की भेंट चढ़ा दिया गया। नारी सम्मान और सशक्तिकरण के विषय में इस प्रकार की नकारात्मक राजनीति अत्यंत निंदनीय है। देश की हर माँ, बहन और बेटी इसका जवाब अवश्य देगी।
