Gurmeet singh chandhok

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल को Delhi-Dehradun Expressway को जनता को समर्पित कर दिया है। इसके साथ ही उत्तराखंड के लिए रोजगार और पर्यटन का ग्रीन कॉरिडोर शुरू हो गया है। अब दिल्ली-देहरादून का सफर 6 घंटे से घटकर महज ढाई घंटे में पूरा हो जाएगा। इसके साथ ही चारधाम यात्रा, कॉर्बेट एवं राजाजी नेशनल पार्क, मसूरी, टिहरी और उत्तराखंड के विभिन्न पर्यटक स्थलों पर आने वाले सैलानियों की तादात बढ़ने की उम्मीद है।
राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित होगा “ग्रीन कॉरिडोर”
बता दें ये एक्सप्रेसवे केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला “ग्रीन कॉरिडोर” साबित होने जा रहा है। यह कॉरिडोर पहाड़ और मैदान के बीच की दूरी को कम करते हुए किसानों, उद्यमियों और स्थानीय उत्पादकों को सीधे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा।
बड़े शहरों तक पहुंचेंगे उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पाद
अब हर्षिल के प्रसिद्ध सेब, ज्योतिर्मठ और चकराता की राजमा, पुरोला के लाल चावल और रुद्रप्रयाग के बुरांश का जूस जैसे पारंपरिक और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से और कम लागत पर बड़े शहरों तक पहुंच सकेंगे। लॉजिस्टिक लागत में कमी आने से किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और आर्थिक स्थिरता आएगी।
राज्य में कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउसिंग, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और एग्री-लॉजिस्टिक्स जैसे सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। इस परियोजना से परिवहन क्षेत्र, कृषि आधारित उद्योग, छोटे और मध्यम उद्योगों को गति मिलेगी। इससे पलायन की समस्या को भी काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी।
पर्यटन क्षेत्र के लिए फायदेमंद सिद्ध होगा एक्सप्रेसवे
इसके अलावा, यह कॉरिडोर पर्यटन क्षेत्र के लिए भी बेहद फायदेमंद सिद्ध होगा। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण देश-विदेश के पर्यटक आसानी से उत्तराखण्ड के दूरस्थ और प्राकृतिक स्थलों तक पहुँच सकेंगे, जिससे स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग और हस्तशिल्प उद्यम को भी नई ऊर्जा मिलेगी
