
US Iran talks: मिडिल ईस्ट में चल रही टेंशन खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। ईरान- इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ी ये जंग के अभी खत्म होने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं। सीजफायल के लिए किए जा रहे प्रयासों में ठहराव आ गया है। ईरान ने मध्यस्थता के लिए तय वार्ता में हिस्सा लेने से साफ इंकार कर दिया है। रिपोर्ट के असुनार ईरान ने अमेरिका की शर्तों को भी ठुकरा दिया है।
दरअसल वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में ये जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान के साथ-साथ क्षेत्रीय देशों द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर कराने के प्रयास किए जा रहे है। जो अब नाकाम साबित होते नजर आ रहे हैं।
लंबी चलेगी ये जंग!, Iran-Israel War
आपको बता दें कि ईरान ने ये साफ किया है कि वो आने वाले दिनों में इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से नहीं मिलेगा। साथ ही वो अमेरिका की मांगों को भी स्वीकार नहीं करता है। रिपोर्ट में कहा गया, “ईरान ने आधिकारिक तौर पर मध्यस्थों को बताया कि वो इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने को तैयार नहीं है और अमेरिकी मांगें अस्वीकार्य हैं।”
पाकिस्तान ने रखा मेजबानी का प्रस्ताव
आपको बता दें कि इससे पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के लिए पाकिस्तान ने मेजबानी करने की पेशकश की थी। हालांकि मध्यस्थता के इन प्रयासों में कुछ तेजी देखने को नहीं मिली। जिसके वजह से अब ये प्रस्ताव टल गया है। बता दें कि इस्लामाबाद ने सार्थक वार्ता की मेजबानी का प्रस्ताव रखा था।
अमेरिका ने क्या कहा?
तो वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हिंट दिया कि वो ईरान के साथ बातचीत में हैं। उन्होंने कहा था, “हम इस वार्ता में बेहद अच्छी प्रगति कर रहे हैं.” हालांकि उन्होंने कोई और जानकारी नहीं दी।
ईरान ने मिलने से भी किया इंकार
ईरान ने साफ कहा है कि वो पाक के जरिए होने वाली बातचीत में शामिल नहीं होगा। ईरान के प्रवक्ता एस्माइल बाघई की माने तो उन्होंने बताया कि अमेरिका से कोई भी सीधी वार्ता नहीं हुई है। दूसरों के जरिए अमेरिका की “ज्यादा और गलत” मांगें भेजी जा रही हैं।
अमेरिका की शर्तों को ईरान ने ठुकराया
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान भी कोशिश कर रहा है। लेकिन इस बातचीत में ईरान शामिल नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि युद्ध खत्म होना अच्छा है। लेकिन ये भी याद रखा जाए कि इसकी शुरुआत किसने की। ईरान को अमेरिका ने 15 पॉइंट का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन ईरान ने उसे “अवास्तविक और बेकार” बताकर ठुकरा दिया।
