Gurmeet singh chandhok

उत्तराखंड के पवित्र बदरीनाथ धाम क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है। अब धाम में धार्मिक अयोजनों को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन और पंचायत ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना अनुमति कोई भी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सकेगा।
बदरीनाथ धाम में बिना अनुमति नहीं होंगे धार्मिक कार्यक्रम
नए नियमों के तहत भागवत कथा, भंडारा या अन्य धार्मिक अयोजनों के लिए पहले पंचायत से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति कार्यक्रम करने पर संबंधित आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जुर्माना भी लगाया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर अधिकतम 50 हजार रुपए तक जुर्माना देना पड़ सकता है।
नगर पंचायत ने बनाए सख्त नियम
बता दें हर साल बदरीनाथ धाम की यात्रा के दौरान श्रद्धालु मंदिर में भागवत कथा और भंडारे का अयोजन करवाते हैं। कुछ तीर्थयात्री मंदिर समिति से अनुमति लेते हैं तो कुछ बिना अनुमति के ही आयोजन करवाते हैं। नगर पंचायत ने अब इन गतिविधियों पर काबू पाने के लिए तीन उप-नियम बनाए हैं।
यूज़र चार्ज का भुगतान करना होगा अनिवार्य
विशेष रूप से, इनमें मांसाहारी भोजन के परिवहन और सेवन पर रोक संबंधी 2026 का उप-नियम, झोपड़ियों और अस्थायी आवासों के नियंत्रण और स्वच्छता संबंधी उप-नियम और भंडारों, भागवत पाठ और विशेष आयोजनों के विनियमन संबंधी उप-नियम शामिल हैं। इसके अलावा, उचित प्रबंधन और लॉजिस्टिक सहायता सुनिश्चित करने के लिए, एक ऐसी व्यवस्था लागू की गई है जिसके तहत अनुमति प्राप्त करने के अतिरिक्त, एक ‘यूज़र चार्ज’ का भुगतान करना भी अनिवार्य है।
बदरीनाथ क्षेत्र में मांस लाने पर लगाया सख्त प्रतिबंध
प्रशासन का कहना है कि यह फैसला क्षेत्र की धार्मिक मर्यादा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया है। इतना ही नहीं बदरीनाथ क्षेत्र में मांस लाने पर भी सख्त प्रतिबंध लगाया गया है। अगर कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी
