
उत्तराखंड में चार धाम परियोजना के तहत गंगा के ऊपरी क्षेत्रों में प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी और पूर्व केंद्रीय मंत्री करण सिंह ने सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और बीआरओ (BRO) को पत्र लिखकर दो प्रमुख सड़क चौड़ीकरण खंडों को दी गई वन स्वीकृति रद्द करने की मांग की है।
चारधाम सड़क चौड़ीकरण को लेकर भाजपा नेताओं ने लिखा पत्र
पत्र में कहा गया है कि हिमालय के इस नाजुक क्षेत्र में बढ़ते आपदा जोखिम को देखते हुए यह कदम आवश्यक है। भाजपा नेताओं ने भागीरथी इको-सेंसिटिव ज़ोन में चल रहे और प्रस्तावित कार्यों का नए सिरे से मूल्यांकन करने की भी मांग की है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि भागीरथी घाटी में सड़क की चौड़ाई 5.5 मीटर तक सीमित रखी जाए। उनका कहना है कि यह निर्णय स्थानीय लोगों की मांग, स्थापित वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग तर्कों और क्षेत्र की भौगोलिक और पारिस्थितिक संवेदनशीलता के अनुरूप होना चाहिए।
हर्षिल और थराली आपदा का दिया उदाहरण
वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में तेज़ी से बढ़ते तापमान के कारण आपदाओं की आवृत्ति और गंभीरता बढ़ रही है। उन्होंने अगस्त 2025 में धराली और हर्षिल में पूर्व में आई आपदाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में विकास कार्यों को अत्यंत सावधानी से किया जाना चाहिए। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि झाला-जंगला खंड में देवदार के जंगल में लगभग 7 हजार पेड़ों की कटाई और नेताला बाईपास को दी गई वन स्वीकृति, सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के विपरीत है। इसी समिति ने चार धाम परियोजना को सशर्त मंजूरी दी थी।
सुप्रीम कोर्ट सिफारिशों का दिया हवाला
नेताओं ने आरोप लगाया कि ये स्वीकृतियां न केवल सुप्रीम कोर्ट पैनल की सिफारिशों के खिलाफ हैं, बल्कि एहतियाती सिद्धांत का भी उल्लंघन करती हैं। झाला-जंगला क्षेत्र के संबंध में पत्र में कहा गया है कि यह वन क्षेत्र ढीले मलबे और अस्थिर भू-वैज्ञानिक संरचना पर स्थित है, ठीक उसी इलाके में जहां हाल में धराली आपदा हुई थी। वरिष्ठ नेताओं ने यह भी बताया कि सरकार के उच्च स्तर से उन्हें आश्वासन मिला है कि उनकी चिंताओं और मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
