
साल 2024–2025 के समय वन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में मजूदरों को टूलकिट बांटी गई थी। उसी में गड़बड़ियों का मामला सामने आया था। जिसको लेकर अब विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। श्रमायुक्त पीसी दुम्का ने मामले का सज्ञांन लेते हुए इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी उप श्रमायुक्त, देहरादून को सौंपी गई है। 15 दिन के अंदर उन्हें पूरी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए है।
मृत मजदूरों के नाम पर बांटी गई टूलकिट
यह कार्रवाई उस समाचार के बाद हुई, जिसमें मीडिया से बातचीत के दौरान अधिकारियों ने स्वीकार किया कि पूर्व में टूलकिट एवं अन्य सामग्री वितरण की प्रक्रिया में खामियां रही हैं। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर प्रकाशित रिपोर्ट में यह उजागर हुआ था कि कुछ मामलों में मृतक श्रमिकों के नाम पर भी किट वितरित कर दी गई थी, जिससे पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए।
श्रमायुक्त ने 15 दिन में मांगी रिपोर्ट
ये कार्रवाई तब हुई जब मीडिया से बातचीत के दौरान अधिकारियों ने ये बात कबूली कि पहले टूलकिट और बाकी सामग्री बांटने की प्रक्रिया में खामियां रही हैं। RTI से मिले दस्तावेजों के आधार पर आई रिपोर्ट में ये भी खुलासा हुआ था कि कुछ केसिस में मृत मजदूरों के नाम पर भी टूलकिट बांटी गई थी। जिससे विभाग की पारदर्शिता पर काफी गंभीर सवाल खड़े हुए।
वन क्लिक डीबीटी के जरिए मजूदरों के खातें में भेजे जा रहे पैसे
श्रमायुक्त पीसी दुम्का ने ये बात साफ की कि सीएम सिंह धामी के निर्देश के बाद अब श्रमिक कल्याण योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए व्यवस्था में बदलाव किए गए। पहले मौजूद ऑफलाइन प्रणाली को खत्म कर पूरी तरह से वितरण प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। अब सभी अनुदान वन क्लिक डीबीटी के जरिए सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं।
51 करोड़ से अधिक की दी गई सहायता
विभाग के अनुसार बीते छह महीनों में 20 हजार से ज्यादा पंजीकृत मजदूरों को डीबीटी के चलते 51 करोड़ से अधिक की सहायता दी जा चुकी है। इसके साथ ही सामग्री वितरण को लेकर भी नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। इसके लिए मोबाइल एप बनाया गया है जिसके माध्यम से लाभार्थियों की लाइव फोटो और लोकेशन का सत्यापन किया जा रहा है। इससे फर्जीवाड़ा और दो-बार मिलने आदि लाभ पर रोक लगेगी।
मुख्यमंत्री पोर्टल पर आने वाली शिकायतें हुई कम
श्रम विभाग के इस लेबर सेस पोर्टल की तारीफ केंद्रीय मंत्री ने भी की है। उन्होंने अन्य राज्यों को भी इसे अपनाने की सलाह दी है।अब पहले चलने वाला ऑफलाइन प्रशिक्षण डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले जाया जा चुका है। विभाग ने बताया कि इससे मुख्यमंत्री पोर्टल पर मिलने वाली शिकायतों में भी कमी आई है।
कैग की रिपोर्ट में उठाए गए सवाल
कैग की रिपोर्ट में जो सवाल उठाए गए थे उसमें विभाग का कहना है कि कोविड-19 के समय पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया प्रभावित हुई थी। उस समय हालाक कुछ ऐसे थे कि मजदूरों और उनके परिवार वालों को जरूरी मदद देना आवश्यक हो गया था। इसी को लेकर संबंधित तथ्य कैग को उपलब्ध करा दिए गए हैं। आने वाले ऑडिट में इन मामलों की जांच की जाएगी। फिलहाल 15 दिनों में आने वाली जांच रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। इसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
