
Gurmeet singh chandhok
हल्द्वानी। नैनीताल रोड से सटे वार्ड नंबर 48 मल्ली बमौरी में कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। निगम की टीम पशु चिकित्सक के साथ एक खूंखार कुत्ते को पकड़ने के लिए पहुंची थी।संदेह के आधार पर एक कुत्ता पकड़ भी लिया। जिसके बाद निगम व स्थानीय लोगों को लगा कि कई दिनों से मंडरा रहा संकट अब दूर हो गया है। लेकिन कुछ ही देर में पकड़े गए कुत्ते के साथी (अवारा कुत्ते) ने लोगों पर झपटना शुरू कर दिया। हमले में तीन लोग घायल हुए हैं। जिसमें महिला और बच्चा भी शामिल है। फिलहाल क्षेत्र में दहशत का माहौल बरकरार है।वार्ड नंबर 48 और वार्ड नंबर पांच पालीशीट में 25 से 28 जनवरी के बीच करीब 20 लोग कुत्तों का शिकार हो चुके हैं। ज्यादा आतंक मल्ली बमौरी वार्ड में है। यहां के कई लोगों को अस्पताल तक भर्ती कराना पड़ा। शिकायत पर बुधवार को निगम की टीम दो बार कुत्तों को पकड़ने के लिए पहुंची थी। लेकिन वह गायब हो गया।
वहीं, सुबह आठ से 11.30 बजे तक वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. मनोज कांडपाल, एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर के पशु चिकित्सक डा. महेंद्र व निगम कर्मचारियों ने अभियान चलाकर वार्ड 48 में एक संदिग्ध कुत्ते को जाल में फंसाकर कैद कर लिया। इसके अलावा पांच को वैक्सीन भी लगाई गई। लेकिन इसके तुरंत बाद दूसरा अवारा कुत्ता स्थानीय लोगों के लिए घातक साबित हो गया।इसने गोविंद बल्लभ तिवारी, गीता पुनेठा और घर से सामान लेने के लिए दुकान की तरफ गए एक बच्चे को भी काट डाला। यानी मल्ली बमौरी में कुत्तों का आतंक अब भी बरकरार है। वहीं, निगम से लेकर प्रशासनिक अफसरों से शिकायत कर चुके स्थानीय पार्षद मुकुल बल्यूटिया का कहना था कि बड़ा क्षेत्र होने के कारण कुत्तों के विरुद्ध लंबा अभियान चलाने की जरूरत है। पीड़ित लोग वार्ड के अलग-अलग हिस्सों के निवासी हैं।
पकड़े गए कुत्ते की आठ दिन निगरानी होगी
वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा मनोज कांडपाल के अनुसार जाल में कैद कुत्ते को एबीसी सेंटर के बाड़े में रखा गया है।। यहां सात-आठ दिन तक उसकी निगरानी की जाएगी। ताकि पता चल सके कि वह पागल यानी रेबीज संक्रमित तो नहीं। अभी केवल संदेह के आधार पर उठाया है। वहीं, समस्या के समाधान को टीम दोबारा भेजी जाएगी।
रखने को शेल्टर तक नहीं, दावों का दौर जारी
साढ़े चार लाख की आबादी वाले निगम क्षेत्र में अक्सर अवारा कुत्तों के आतंक से जुड़ी घटनाएं सामने आती है। निगम नसबंदी अभियान तो चला रहा है लेकिन उसके पास कुत्तों को रखने के लिए शेल्टर की व्यवस्था नहीं है। राजपुरा में बहुमंजिला शेल्टर के निर्माण में डेढ़ करोड़ का खर्चा आएगा। इसके अलावा हर विभाग में नोडल बनेंगे। सार्वजनिक स्थानों से कुत्ते हटाए जाएंगे। लेकिन दावों और जमीनी हकीकत एक-दूसरे से अलग है।
