






वनाग्नि रोकथाम को लेकर प्रशासन सतर्क: गांव-गांव समितियां, व्यापक जनजागरूकता, विभागीय समन्वय और दोषियों पर कानूनन सख्त कार्रवाई के निर्देश*
रिपोर्टर महेन्द्र सिंह बिष्ट
जनपद में संभावित वनाग्नि की घटनाओं की रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण हेतु जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन विभाग, पुलिस, तहसील प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, परिवहन विभाग तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि वनाग्नि की घटनाओं में लापरवाही या संलिप्तता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम, 1927, वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980, भारतीय दंड संहिता की धारा 285 एवं 336, तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के अंतर्गत सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि वनाग्नि एक मानवीय कृत्य से उत्पन्न आपदा है और इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।
जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि सभी संवेदनशील गांवों में अनिवार्य रूप से वनाग्नि प्रबंधन समितियों का गठन किया जाए तथा नियमित रूप से रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए। गांवों में जागरूकता के लिए समय-समय पर गोष्ठियां कराई जाएं, ताकि ग्रामीणों को वनाग्नि के दुष्परिणामों के प्रति सजग किया जा सके।
उन्होंने कहा कि वर्तमान भूमि में कम आर्द्रता के कारण वनाग्नि की घटनाओं की संभावना अधिक है, इसलिए तहसील स्तरीय टीमें पूर्ण सतर्कता बरतें। फायर वॉचर्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रभागीय वनाधिकारी आदित्य रत्ना ने वनाग्नि नियंत्रण हेतु उपलब्ध शमन उपकरणों एवं संसाधनों की जानकारी दी। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि अग्निशमन कर्मियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और उपकरणों की खरीद नियमानुसार एवं उच्च गुणवत्ता के साथ सुनिश्चित की जाए। साथ ही वन विभाग द्वारा क्रू स्टेशनों का नियमित निरीक्षण किया जाए।
बैठक में अवगत कराया गया कि वन विभाग द्वारा नियमित रूप से कंट्रोल बर्निंग, नुक्कड़ नाटक, मॉक ड्रिल एवं जनजागरूकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग को सड़कों के किनारे झाड़ियों के नियमित कटान के निर्देश दिए गए, ताकि आग के प्रसार को रोका जा सके।
सभी उपजिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे वनाग्नि सुरक्षा नियमों का पालन न करने की संभावित कानूनी परिणतियों के संबंध में स्पीकिंग ऑर्डर जारी करें और व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें। यदि कोई व्यक्ति आग लगाते या लापरवाही करते हुए पकड़ा जाता है तो उसके विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए।
जिलाधिकारी ने सभी विभागों—पुलिस, तहसील प्रशासन, वन विभाग, लोक निर्माण विभाग एवं आपदा प्रबंधन—के बीच बेहतर समन्वय पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समन्वित प्रयासों से ही वनाग्नि की घटनाओं को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है।
सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को निर्देश दिए गए कि टैक्सी यूनियनों के माध्यम से वाहनों में धूम्रपान अवशेषों (सिगरेट/बीड़ी के टुकड़े) का सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित कराया जाए तथा सभी वाहन चालकों को सावधानी संबंधी निर्देश जारी किए जाएं, जो वाहनों में यात्राओं के लिए चस्पा किए जायेंगे। साथ ही पिरूल के सुरक्षित निस्तारण एवं प्रबंधन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि वन संपदा की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। जनभागीदारी, सतर्कता और सख्त कानूनी कार्रवाई के माध्यम से ही वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
बैठक में अपर जिलाधिकारी एन एस नबियाल, परियोजना निर्देशक शिल्पी पंत तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
