
Supreme Court on SC-ST Act: आज यानी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट को लेकर एक अहम फैसला सुनाया। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति अगर हिंदू धर्म के अलावा किसी भई अन्य धर्म को अपनाता है तो उसकी अनुसूचित जाति का दर्जा खत्म हो जाएगा। यानी कि उसे एससी-एसटी नहीं माना जाएगा।
‘रिजर्वेशन को लेकर कोर्ट का बड़ा फैसला!, Supreme Court on SC-ST Act
दरअसल ये फैसला जस्टिस पी. के. मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति का दर्जा पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा अगर व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है। धर्मांतरण करने से ये पूरी तरह से समाप्त हो जाता है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के पहले के एक फैसले को सही ठहराते हुए ये फैसला सुनाया। जिसमें कहा गया था कि लोग ईसाई धर्म को अपनाकर सक्रिय रूप से उसका पालन करते हैं, वो लोग नुसूचित जाति (SC) का दर्जा बरकरार नहीं रख सकते।
खत्म होगा SC-ST ACT अगर…
इसी को सही बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 में ये बात साफ तौर पर बताई गई थी। इस आदेश में लगाई गई रोक भी पूरी तरह से लागू होती है। 1950 के आदेश के क्लॉज 3 को दोहराते हुए कोर्ट ने ये साफ किया कि इसमें बताए गए धर्मों के अलावा किसी और धर्म को अपनाने पर अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत खत्म होगा, फिर चाहें जन्म स्थिति जो भी हो।
नहीं मिलेगा आरक्षण का अधिकार
न्यायालय ने खंड 3 के तहत ये फैसला सुनाया। व्यक्ति अनुसूचित जाति का सदस्य ना होने पर वो संविधान या संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के तहत किसी भी लाभ का हकदार नहीं होगा। फिर चाहें वो वैधानिक लाभ हो, सुरक्षा हो या फिर आरक्षण का अधिकार ही क्यों ना हो। इस रोक में कोई भी अपवाद नहीं है
