Gurmeet singh chandhok

कोटद्वार में ‘बाबा’ नाम को लेकर हुए विवाद में दर्ज एफआईआर को लेकर अब सियासत शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन और भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कार्रवाई को अन्यायपूर्ण और पक्षपातपूर्ण करार दिया है।
हरीश रावत ने आरोप लगाया कि घटना के दौरान बाहर से आए लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, लेकिन कार्रवाई करते समय पुलिस ने स्थानीय व्यक्ति दीपक कुमार को ही मुख्य आरोपी बना दिया, जबकि अन्य को केवल 30 अज्ञात आरोपियों की श्रेणी में डाल दिया गया।नामजद आरोपी सिर्फ दीपक, बाकी अज्ञात_ यह कैसा न्याय ?”पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जब दीपक कुमार ने अपनी लिखित शिकायत में 8 लोगों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज कराए, और घटनास्थल के वीडियो में अराजकता फैलाने वालों के चेहरे साफ नजर आ रहे हैं, तो फिर उन्हें अज्ञात क्यों बताया गया?
उन्होंने कहा, “यह कैसी पुलिसिंग है, जहां सबूत सामने होने के बावजूद असली दोषियों को बचाया जा रहा है और निर्दोष को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।”
“जिसे सम्मानित किया जाना चाहिए था, उसी पर मुकदमा”
हरीश रावत ने बेहद तीखे शब्दों में कहा कि “दीपक कुमार की भूमिका शांति और संवाद की थी। जिसे सम्मान दिया जाना चाहिए था, उसी पर FIR दर्ज कर दी गई।”
उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि सच, शांति और सामाजिक सौहार्द के पक्ष में खड़े लोगों को ही सजा दी जा रही है, जबकि अराजकता फैलाने वालों को संरक्षण मिल रहा है।
उत्तराखंड की संस्कृति नफरत नहींउत्तराखंड पर्यटन गाइड
पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि
“घृणा और नफरत फैलाना किसी राजनीतिक दल का एजेंडा हो सकता है, लेकिन यह उत्तराखंड की संस्कृति, पहचान और परंपरा नहीं हो सकती।”
उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की घटनाएं राज्य की सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे के लिए गंभीर खतरा हैं।
भाजपा पर सीधा आरोप ‘हुड़दंगी संस्कृति को बढ़ावा’
भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए हरीश रावत ने आरोप लगाया कि राज्य में हुड़दंगी संस्कृति और नफरत की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति समाज को बांटने का काम करती है और इसे पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए।
“आखिर बदनामी पुलिस की ही होती है”
पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि “ऐसी चयनात्मक कार्रवाई में अंततः बदनामी बेचारी पुलिस की ही होती है।”
उन्होंने मांग की कि इस मामले में निष्पक्ष जांच की जाए और यदि कहीं चूक हुई है तो जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।इंसानियत के पक्ष में खड़े दीपक बने सोशल मीडिया की आवाज, FIR के बाद क्या कहा..
गणतंत्र दिवस के दिन एक मुस्लिम व्यापारी की दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द को लेकर हुए विवाद ने अब सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का रूप ले लिया है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में हैं दीपक कुमार जिन्होंने वायरल वीडियो में खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताया और कथित तौर पर दुकानदार को परेशान कर रहे बजरंग दल के सदस्यों के सामने डटकर खड़े दिखाई दिए।
वीडियो में दीपक एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार और विरोध कर रहे लोगों के बीच खड़े नजर आते हैं। उनका यह हस्तक्षेप देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और दीपक अचानक इंसानियत और सामाजिक सौहार्द की आवाज के तौर पर पहचाने जाने लगे।
“जब भी जरूरत होगी, फिर खड़ा रहूंगा”
दीपक कुमार ने साफ कहा है कि उन्हें अपने दखल देने के फैसले पर कोई पछतावा नहीं है।
उनका कहना है “मुझे नतीजों का डर नहीं है। जब भी जरूरत होगी, मैं फिर इंसानियत के लिए खड़ा रहूंगा।”
सोशल मीडिया पर जबरदस्त उछाल
घटना के बाद दीपक की ऑनलाइन लोकप्रियता में जबरदस्त उछाल आया है।
फेसबुक : 26 जनवरी से पहले करीब 1,500 फॉलोअर्स – अब 4.3 लाख से अधिक
इंस्टाग्राम : करीब 1,000 फॉलोअर्स – 5 लाख से ज्यादा
हालांकि, बढ़ती लोकप्रियता के साथ दबाव और खतरे की आशंका भी बढ़ी है।
“समस्या कोटद्वार से नहीं, बाहर से आई”
दीपक का कहना है कि असली परेशानी स्थानीय लोगों से नहीं, बल्कि बाहर से आए लोगोंसे हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि 31 जनवरी को देहरादून और ऋषिकेश से आए 30-40 लोगों ने उनके जिम और घर के बाहर प्रदर्शन किया, सांप्रदायिक नारे लगाए और उनके परिवार के सामने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की,वह भी पुलिस की मौजूदगी में। “मैं नहीं झुका। नफरत के आगे कभी नहीं झुकूंगा।”दीपक कुमार
FIR और आरोप
पुलिस ने 31 जनवरी की रात कुल तीन FIR दर्ज कीं।
एक FIR दीपक कुमार और विजय रावत के खिलाफ दर्ज की गई, जिसमें मारपीट, आपराधिक धमकी, शांति भंग जैसी धाराएं लगाई गईं।
यह FIR बजरंग दल के सदस्य कमल पाल की शिकायत पर दर्ज हुई।
दीपक इसे बदले की कार्रवाई मानते हैं। उनका कहना है कि यह “इंसानियत के लिए खड़े होने की सजा” है।
विजय रावत का आरोप – नाम दिए, फिर भी अज्ञात
इस मामले में वीडियो में दिखने वाले एक अन्य व्यक्ति विजय रावत ने बताया कि 31 जनवरी की घटना के बाद उन्होंने लिखित शिकायत दी थी, जिसमें बजरंग दल से जुड़े कुछ लोगों के नाम और वाहनों के नंबर तक दर्ज थे।
इसके बावजूद पुलिस ने 30-40 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
पुलिस का पक्ष
कोटद्वार के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि दीपक की शिकायत को जांच में शामिल किया गया है।
अलग FIR इसलिए दर्ज नहीं की गई क्योंकि मामला पहले से पंजीकृत था।
उन्होंने कहा कि वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है और फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
दो और FIR दर्ज
दुकानदार की शिकायत पर बजरंग दल के दो कार्यकर्ताओं समेत चार लोगों के खिलाफ मामला
पुलिस की ओर से दर्ज FIR में करीब 40 लोगों पर सांप्रदायिक नारेबाजी, सड़क जाम और धार्मिक वैमनस्य फैलाने के आरोप
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर दीपक को भारत का “हीरो” बताते हुए समर्थन जताया
कांग्रेस नेता विकास वर्मा ने इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की कोशिश बताया
दुकानदार शोएब अहमद का बयान
दुकान मालिक शोएब अहमद ने कहा कि उनकी दुकान करीब 42 साल पुरानी है और ‘बाबा’ नाम उन्होंने अपनी पसंद से रखा था।
“पहले कभी किसी ने आपत्ति नहीं की। 26 जनवरी को अचानक दबाव बनाया गया कि नाम तुरंत बदला जाए।”
पुलिस की अपील – सोशल मीडिया पर न फैलाएं भ्रम
एएसपी चंद्र मोहन सिंह ने कहा कि स्थिति पूरी तरह सामान्य है।
फ्लैग मार्च और पैदल गश्त जारी है।
उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया पर अफवाहें न फैलाने की अपील की है।
