Gurmeet singh chandhok

देहरादून। भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) उत्तराखंड के किसानों और स्थानीय उत्पादकों में उम्मीदें जगा रहा है। अब तक यूरोप जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक राज्य के कृषि और पारंपरिक उत्पादों की पहुंच सीमित रही है, लेकिन एफटीए के लागू होने से यह स्थिति बदलने की बड़ी उम्मीद है। शुल्क कम होने और व्यापार प्रक्रियाएं आसान होने से उत्तराखंड के उत्पाद यूरोप में सस्ती और प्रतिस्पर्धी कीमत पर पहुंच सकेंगे।
उत्तराखंड में एफटीए का सीधा लाभ मंडुवा, झंगोरा, राजमा, चौलाई, शहद, मसाले, जड़ी-बूटी, आयुष और आर्गेनिक उत्पादों को मिलने की संभावना है। अभी तक ऊंचे आयात शुल्क और प्रमाणन की जटिलताओं के कारण इन उत्पादों का निर्यात सीमित था। शुल्क घटने से किसानों और उत्पादक समूहों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है।
27 देशों में उत्तराखंड के उत्पादों को मिल सकता नियमित बाजार
एफटीए के बाद यूरोपीय यूनियन के 27 देशों में उत्तराखंड के उत्पादों को नियमित बाजार मिल सकता है। इससे सबसे ज्यादा फायदा छोटे किसानों, किसान उत्पादक संगठनों और स्वयं सहायता समूहों को होगा। निर्यात के जरिए उन्हें लंबे समय तक आर्डर मिलने की संभावना बनेगी, जिससे किसानों की आमदनी ज्यादा स्थिर होगी।जानकारों का कहना है कि इससे पारंपरिक पहाड़ी फसलों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मंडुवा और झंगोरा जैसी फसलें, जो पोषण की दृष्टि से बेहद उपयोगी हैं, अब केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रहेंगी।
हस्तशिल्प और कारीगरी को भी नई आस
एफटीए से केवल कृषि उत्पाद ही नहीं, बल्कि हस्तशिल्प, ऊनी वस्त्र और स्थानीय कारीगरी को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की संभावना है। अब तक ब्रांडिंग और मार्केटिंग की कमी के कारण ये उत्पाद सीमित दायरे में सिमटे रहे। यूरोप जैसा बाजार मिलने से इनकी ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी और गांव स्तर पर कारीगरों को नए रोजगार के अवसर मिलेंगे।
रोजगार और पलायन पर असर
भारत-यूरोपीय यूनियन मुक्त व्यापार समझौता उत्तराखंड के लिए यूरोप तक नए रास्ते खोलने वाला साबित हो सकता है। बेहतर तैयारी के साथ किए गए प्रयासों से यह समझौता पहाड़ के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के साथ-साथ स्थायी आय और रोजगार का मजबूत आधार बन सकता है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बनेंगे और पहाड़ी क्षेत्रों से होने वाले पलायन पर भी असर पड़ सकता है।
‘प्रदेश निर्यात के क्षेत्र में लगातार बेहतर कर रहा है। पहाड़ी राज्यों में उत्तराखंड ने पहला स्थान प्राप्त किया है। भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच व्यापार बढ़ने की स्थिति में इसका सीधा लाभ उत्तराखंड को भी मिलना तय है।’ –विनय शंकर पांडेय, सचिव-उद्योग
