





सरपंचों के सुझावों से तय होगी वन पंचायतों की विकास दिशा
रिपोर्टर महेन्द्र सिंह बिष्ट
जनपद चम्पावत में वन पंचायतों को सशक्त एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिला सभागार में जिलाधिकारी मनीष कुमार की अध्यक्षता में वन पंचायत सरपंचों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए वन पंचायत सरपंचों ने प्रतिभाग किया। साथ ही उपाध्यक्ष वन एवं पर्यावरण सलाहकार समिति, दर्जा राज्य मंत्री श्याम नारायण पांडे भी उपस्थित रहे।
बैठक में बताया गया कि जनपद में कुल 568 वन पंचायतें संचालित हैं, जिनके अंतर्गत 25173.02 हेक्टेयर क्षेत्रफल आता है। वन पंचायतों का गठन वन अधिनियम की धारा 28 के अंतर्गत किया जाता है, जिसमें कुल 09 सदस्य होते हैं। इनमें 50 प्रतिशत महिलाएं एवं 02 मनोनीत सदस्य शामिल होते हैं। सरपंच का कार्यकाल 05 वर्ष का होता है तथा कोई भी सरपंच लगातार दो बार इस पद पर नहीं रह सकता।
संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य वन पंचायतों को सशक्त बनाना, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण को बढ़ावा देना तथा वन पंचायतों की आय बढ़ाने, संचालन एवं प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं एवं सुझावों पर विस्तार से चर्चा करना रहा। जिलाधिकारी द्वारा सभी सरपंचों के सुझाव एवं शिकायतों को गंभीरता से सुना गया।
इस दौरान खुमाड़ के दान सिंह ने बांज के जंगलों की सुरक्षा एवं वनाग्नि प्रबंधन पर जोर दिया, जौलाड़ी के नारायण दत्त ने झाड़ी कटान कर व्यवस्थित वन निर्माण का सुझाव दिया, तड़ाग के उमेश सिंह ने वन पंचायतों की चारदीवारी एवं काला बांसा घास के नियंत्रण की मांग रखी, रिखोली के जगदीश सिंह ने पंचायत भवन निर्माण की आवश्यकता बताई तथा वसंत तड़ागी ने चाल-खाल एवं जल स्रोतों के जीर्णोद्धार पर बल दिया।
इसके अतिरिक्त अन्य सरपंचों द्वारा पौधों की सुरक्षा हेतु जाल, क्लाइमेट आधारित वृक्षारोपण, ओपन जिम की स्थापना, वन पंचायत भूमि पर अतिक्रमण रोकने, सौंदर्यीकरण तथा वन कर्मियों की सुरक्षा हेतु उपकरण उपलब्ध कराने जैसे सुझाव एवं मांगें रखी गईं।
जिलाधिकारी ने सभी प्रस्तावों को सुनकर सम्बन्धित अधिकारियों को नियमानुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
बैठक में जिलाधिकारी ने वृक्षविहीन क्षेत्रों की पहचान कर प्रतिपूरक वनीकरण के अंतर्गत वृक्षारोपण सुनिश्चित करने हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया तथा अपर जिलाधिकारी को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। साथ ही वन पंचायत सरपंचों को उनके अधिकारों एवं नियमावली की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई और वन विभाग को पृथक कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए।
जिलाधिकारी ने सभी सरपंचों से अगली बैठक में अपने-अपने वन पंचायत क्षेत्रों की विकास योजनाएं तैयार कर प्रस्तुत करने का अनुरोध किया, जिससे स्थानीय स्तर पर ही रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल सके।
इस अवसर पर दर्जा राज्य मंत्री श्याम नारायण पांडे ने कहा कि जंगलों का संरक्षण हमारा अधिकार ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। जल संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं तथा समाज में जंगलों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना होगा।
कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी कृष्णनाथ गोस्वामी, जिला विकास अधिकारी दिनेश डिगारी, एसडीओ फॉरेस्ट सुनील कुमार, नेहा सोन, संबंधित रेंजर, वन पंचायत सदस्य एवं वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
