
उत्तरांचल पॉवर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने अधिशासी अभियंता के रिक्त पदों पर वर्षों से लंबित पदोन्नति और अन्य मांगों के निस्तारण न होने पर सोमवार को यूपीसीएल मुख्यालय पर गेट मीटिंग कर विरोध दर्ज कराया। इससे पहले एसोसिएशन की ओर से प्रबंधन को नोटिस भी भेजा गया था।
UPCL मुख्यालय पर इंजीनियर्स का प्रदर्शन
गेट मीटिंग की अध्यक्षता अधीक्षण अभियंता नवीन मिश्रा ने की। इस दौरान महासचिव राहुल चानना ने कहा कि सालों के कानूनी संघर्ष के बाद न्यायालय के आदेशानुसार वरिष्ठता सूची जारी हो चुकी है और इस पर किसी प्रकार का स्थगन आदेश लागू नहीं है। उन्होंने बताया कि पदोन्नत सहायक अभियंता की ओर से दायर अवमानना याचिका भी 3 जनवरी 2026 को खारिज हो चुकी है। प्रबंधन ने हर वार्ता में यह आश्वासन दिया था कि अवमानना याचिका खारिज होने के बाद शीघ्र पदोन्नति प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
सालों के इंतजार के बावजूद भी नहीं की जा रही पदोन्नति
महासचिव ने आरोप लगाया कि एसोसिएशन लगातार संवाद के माध्यम से न्यायोचित मांगों के समाधान का प्रयास करता रहा है, लेकिन वर्षों के इंतजार के बावजूद पदोन्नति नहीं की जा रही। उन्होंने कहा कि नवनियुक्त सहायक अभियंताओं को विभागीय संयोजन की सुविधा, प्रारंभिक इंक्रीमेंट का लाभ और स्थायीकरण जैसे मुद्दों पर भी प्रबंधन की ओर से सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में संगठन को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
93 स्वीकृत पदों में से करीब 40 पद रिक्त
एसोसिएशन के अध्यक्ष युद्धवीर सिंह तोमर ने कहा कि अंतिम वरिष्ठता सूची जारी होने और पात्रता पूरी होने के बावजूद सीधी भर्ती के सहायक अभियंता पिछले 16 वर्षों से पहली पदोन्नति से वंचित हैं। इससे अभियंताओं में भारी रोष है और आंदोलन के प्रथम चरण में गेट मीटिंग के माध्यम से विरोध जताया जा रहा है। बता दें कॉरपोरेशन में अधिशासी अभियंता के 93 स्वीकृत पदों में से करीब 40 पद रिक्त हैं। रिक्त पदों के कारण कई अभियंताओं को दोहरा कार्यभार संभालना पड़ रहा है।
मांगें पूरी नहीं होने तक जारी रहेगा आंदोलन
एसोसिएशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक अधिशासी अभियंता के रिक्त पदों पर पदोन्नति नहीं की जाती और अन्य लंबित मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन के दूसरे चरण में 10 फरवरी 2026 को यूपीसीएल मुख्यालय में विरोध सभा आयोजित की जाएगी।
