

रिपोर्टर महेन्द्र सिंह बिष्ट
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत सक्रिय ‘माँ पूर्णागिरी स्वयं सहायता समूह’ (SHG), टनकपुर क्षेत्र के थ्वालखेड़ा में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यह 13 सदस्यीय महिला समूह स्थानीय किसानों से कृषि उत्पाद खरीदकर उन्हें उचित मूल्य पर बेचने की पहल कर रहा है, जिससे न केवल किसानों को लाभ मिल रहा है, बल्कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए स्थायी आय सृजन का मार्ग भी खुल रहा है।
हाल ही में समूह की महिलाओं ने स्थानीय किसानों से 18 क्विंटल धान खरीदा है। इस खरीदी गई उपज को समूह द्वारा जल्द ही खुले बाजार में उचित मूल्य पर विक्रय किया जाएगा, जिससे किसानों को उनकी मेहनत का न्यायसंगत लाभ मिलेगा और समूह की महिलाओं को व्यवसायिक अनुभव के साथ आर्थिक सशक्तिकरण भी प्राप्त होगा।
इसके पहले, समूह की अध्यक्ष श्रीमती माया मेहर ने बताया कि समूह ने स्थानीय काश्तकारों से 5 क्विंटल गडरी (स्थानीय सब्जी) खरीदी थी। इसे उन्होंने ₹40 प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा और खुले बाजार में ₹55 प्रति किलोग्राम की दर से बेचकर ₹10 प्रति किलोग्राम का शुद्ध मुनाफा कमाया। इस व्यापारिक सफलता ने समूह की महिलाओं को आत्मविश्वास दिया और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया।
‘माँ पूर्णागिरी स्वयं सहायता समूह’ का यह प्रयास NRLM की उस दृष्टि को साकार करता है, जिसमें स्वयं सहायता समूह न केवल अपनी आजीविका में वृद्धि करते हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी मजबूत और पारदर्शी विपणन तंत्र तैयार करते हैं।
समूह की 13 महिलाएं अब अन्य कृषि उत्पादों के क्रय-विक्रय और प्रसंस्करण की योजनाओं पर भी काम कर रही हैं, ताकि ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण को और गति दी जा सके। इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि जब महिलाएं संगठित होकर कार्य करती हैं, तो न केवल उनकी खुद की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है, बल्कि पूरे क्षेत्र में ग्रामीण आजीविका और स्थानीय बाजार को नई दिशा मिलती है।
