Gurmeet singh chandhok

उत्तराखंड के कई जिलों को बड़ी सौगात मिलने वाली है। यहां अर्ली वार्निंग सिस्टम को और भी ज्यादा मजबूत किया जा रहा है। दरअसल राज्य में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आधुनिक तकनीक आधारित उपकरण लगाने के प्रोसेस को तेज कर दिया है। आने वाले महीनों में अलग-अलग जिलों में AWS यानी ऑटोमेटेड वेदर स्टेशन और डॉप्लर रडार लगाए जाएंगे। जो कि आपदा के जोखिम को कम और समय पर सटीक चेतावनी देने में मददगार साबित होंगे।
उत्तराखंड के जिलों को बड़ी सौगात!, 10 जिलों में लगेंगे AWS
सचिव आपदा प्रबंधन व पुनर्वास विनोद कुमार सुमन की माने तो राज्य के 10 जिलों में AWS लगेंगे। जिसमें सबसे ज्यादा आठ उत्तरकाशी और टिहरी में, पौड़ी में सात, देहरादून में पांच, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर में तीन-तीन, अल्मोड़ा में दो और नैनीताल और हरिद्वार में एक-एक AWS लगाया जाएगा। जिससे मौसम की सटीक जानकारी मिल पाएगी। इससे होगा ये कि समय रहते ही अलर्ट जारी हो सकेगा।
तीन जिलों में लगाए जाएंगे डॉप्लर रडार
इसके साथ ही तीन जिलों में डॉप्लर रडार लगाए जाएंगे। देहरादून, अल्मोड़ा, चम्पावत और चमोली में से 3 में भारत मौसम विज्ञान विभाग डॉप्लर रडार लगाएगा। इससे बारिश, मौसम की गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी हो सकेगी। इन जिलों को भूमि चयन कर जल्द ही प्रस्ताव शासन को भेजने हैं।
जीआईएस मैपिंग होगी
समीक्षा बैठक में साफ निर्देश दिए गए है कि सभी 13 जिलों को एनडीएमआईएस पोर्टल पर आपदा मद में किए गए खर्च की डिटेल समय से अपलोड करनी होगी। इसके साथ ही लापता व्यक्तियों को मृत व्यक्ति और राहत से जुड़े कार्य लंबित है। जिन्हें जल्द ही पूरा करने को कहा गया है। प्रदेश में सभी आपदा उपकरणों की जीआईएस मैपिंग होगी। जिसका विवरण आईडीआरएन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
हर जिलें में बनाया जाएगा DDRN
रुद्रप्रयाग की तरह अब हर जिलें में डीडीआरएन (Disaster Dedicated Radio Network) बनाया जाएगा। जिससे आपदा के समय नेटवर्क बाधित न हो। एसईओसी और डीईओसी की तरह अब तहसील पर टीईओसी भी स्थापित होंगे। इससे राहत और बचाव कार्यों में तेजी आएगी
