
उत्तराखंड क्रिकेट के लिए यह एक बेहद दुखद और निराशाजनक घटनाक्रम है। राज्य की क्रिकेट टीम ने रणजी ट्रॉफी 2025-26 में इतिहास रचते हुए पहली बार सेमीफाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन मेजबानी के अधिकार से वंचित कर दिया गया है।
उत्तराखंड से छिनी रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल की मेजबानी
बीसीसीआई (BCCI) के पिच क्यूरेटर राकेश कुमार द्वारा देहरादून के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निरीक्षण करने के बाद पिच और ग्राउंड की खराब हालत पाई गई, जिसके कारण सेमीफाइनल मैच को उत्तराखंड से हटाकर उत्तर प्रदेश के किसी अन्य स्टेडियम संभवतः इकाना स्टेडियम, लखनऊ या ग्रीन पार्क, कानपुर में शिफ्ट कर दिया गया है।
ऐतिहासिक उपलब्धि पर फिरा पानी
उत्तराखंड ने क्वार्टर फाइनल में झारखंड को जमशेदपुर के कीनन स्टेडियम में एक पारी और 6 रनों से हराकर पहली बार रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल में प्रवेश किया था। यह टीम के लिए एक बड़ा मील का पत्थर था, जहां मयंक मिश्रा और अभय नेगी जैसे गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया।
स्टेडियम की बदहाल स्थिति बना कारण
सेमीफाइनल में उत्तराखंड का मुकाबला केएल राहुल की अगुवाई वाली मजबूत कर्नाटक टीम से होने वाला था, जिसमें 5 टेस्ट खिलाड़ी शामिल थे। इस मैच की मेजबानी देहरादून में होती तो राज्य के क्रिकेट प्रेमियों, युवा खिलाड़ियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी फायदा पहुंचता। स्टार खिलाड़ियों की मौजूदगी से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता और क्रिकेट का स्तर ऊंचा उठता। लेकिन स्टेडियम की बदहाल स्थिति ने सब कुछ बर्बाद कर दिया।
स्टेडियम में थी ये कमियां
बीसीसीआई के पिच क्यूरेटर राकेश कुमार ने स्टेडियम का दौरा किया और पाया कि पिच की सतह असमान और खराब हो चुकी है। ग्राउंड में पानी निकासी की व्यवस्था बेहद कमजोर है। रखरखाव की पूरी कमी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय या उच्च स्तरीय मैच आयोजित करना असुरक्षित और अनुचित हो गया। इसके चलते बीसीसीआई ने तुरंत फैसला लिया कि मैच उत्तराखंड से बाहर किया जाए। अन्य राज्यों जैसे सौराष्ट्र, कर्नाटक और बैंगलोर ने भी इस मेजबानी के लिए जोर लगाया था, लेकिन स्टेडियम की बदहाली के चलते उत्तराखंड के बदले उत्तर प्रदेश के स्टेडियमों को चुना गया।
नाच-गाने के कार्यक्रमों तक सिमित रह गए स्टेडियम
बता दें खेल विभाग कई बार दावा कर चुका है कि देहरादून का राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम विश्व स्तरीय सुविधाओं से लैस होगा। खेल मंत्री रेखा आर्या कई बार क्रिकेट और खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता देने की बात कह चुकी हैं, बावजूद इसके जमीनी हकीकत कुछ और ही है। स्टेडियम अब ज्यादातर कॉर्पोरेट लीग मैचों, नाच-गाने के कार्यक्रमों या छोटे आयोजनों तक सीमित रह गया है। रखरखाव पर ध्यान न देने से पिच और बुनियादी ढांचा लगातार बिगड़ता जा रहा है।
हाथ से गया सुनहरा अवसर
विपक्षी पार्टियां इसे सरकार की बड़ी नाकामी करार दे रही हैं। एक क्रिकेट विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यह उत्तराखंड के लिए सुनहरा अवसर था। केएल राहुल (kl rahul) जैसे स्टार खिलाड़ी के आने से युवा प्रेरित होते, क्रिकेट का स्तर बढ़ता और राज्य का नाम राष्ट्रीय पटल पर चमकता। लेकिन खेल विभाग की लापरवाही और उदासीनता ने सब कुछ चौपट कर दिया।”
उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन का खेद
उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन (UCA) के अधिकारियों ने इस फैसले पर गहरा खेद जताया है। उन्होंने कहा कि वे स्टेडियम को जल्द अपग्रेड करने की दिशा में प्रयास करेंगे। लेकिन सवाल वही है क्या अब सरकार जागेगी? क्या खेल सुविधाओं को वास्तविक प्राथमिकता दी जाएगी?
