Gurmeet singh chandhok

देहरादून की एक छत पर पड़ा एक छोटा-सा कट्टा और उसके भीतर जिंदगी। यह कोई सामान्य घटना नहीं थी, यह एक टूटी हुई मोहब्बत, अधूरे सपनों और समाज के डर से जूझती एक युवती की दर्दभरी दास्तान थी। बता दें मंगेतर की सड़क हादसे में दुखद मौत से टूट चुकी युवती ने अपने कलेजे के टुकड़े को खुद से अलग कर दिया।घटना बसंत विहार थाना क्षेत्र के ऋषि विहार की है। एक घर की छत पर कट्टे में नवजात के मिलने की खबर ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। बच्चे के रोने की आवाज से आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और कट्टे के अंदर सिसकिया भर रहे मासूम को देख दंग रह गए। लोगों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मासूम को अपनी संरक्षण में लिया।पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो बच्चे की मां को खोज निकाला। बच्चे की मां ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले उस युवती का रिश्ता एक युवक से तय हुआ था। सगाई के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। लेकिन नियति को शायद यह मंजूर नहीं था। कुछ महीने पहले हरिद्वार में एक सड़क हादसे ने उस युवक की मौत हो गई।शादी से पहले ही मंगेतर की मौत ने युवती को अंदर तक तोड़ दिया। मंगेतर की मौत के सदमे में वह गहरे मानसिक तनाव में चली गई। इसी बीच उसे गर्भ ठहर चुका था। बिखरे हालात में वह अपनी गर्भावस्था पर ध्यान ही नहीं दे सकी। जिस दिन घटना हुई, उसने घर के बाथरूम में अकेले ही बच्चे को जन्म दिया। युवती ने लोकलाज और तानों के खौफ से अपने ही कलेजे के टुकड़े को एक कट्टे में डालकर मकान की छत पर छोड़ दिया।बसंत विहार थाने के एसएसआई दुर्गेश कोठियाल के अनुसार, नवजात को लावारिस छोड़ने के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। सोमवार को युवती की पहचान हो गई। अब युवती और उसके परिजन बच्चे को अपने साथ ले जाने के लिए तैयार हैं और पुलिस आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर रही है। दून अस्पताल के बाल रोग विभाग के एचओडी डॉ. अशोक कुमार के मुताबिक नवजात पूरी तरह स्वस्थ है। डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। जल्द ही उसे डिस्चार्ज किया जाएगा।
