
उत्तराखंड में आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने और मरीजों को सही समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।उत्तराखंड में मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए जल्द ही एक मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया जाएगा। इस ऐप के जरिए मरीज की लोकेशन और हालत के आधार पर एंबुलेंस की आवाजाही पर सीधे नजर रखी जा सकेगी। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग के पास मौजूद 250 से ज्यादा अन्य सरकारी एंबुलेंसों को भी सभी जरूरी सुविधाओं से लैस करके 108 नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, ताकि emergency के वक्त एंबुलेंस की कोई कमी न रहे।
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18% खटारा एंबुलेंस हटेंगी, CS ने दिए जल्द बदलने के आदेश
प्रदेश में 108 एंबुलेंस सेवा की करीब 18 प्रतिशत पुरानी और खटारा हो चुकी गाड़ियों को जल्द ही बदला जाएगा। ये वो गाड़ियां हैं जो 3 लाख किलोमीटर से भी ज्यादा चल चुकी हैं और अक्सर रास्ते में खराब होकर मरीजों की जान जोखिम में डाल देती हैं। सचिवालय में आयोजित व्यय वित्त समिति की बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इस संबंध में कड़े दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि 108 एंबुलेंस सेवा सीधे लोगों की जिंदगी और सांसों से जुड़ी है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में सचिव विनय शंकर पाण्डेय, अपर सचिव नवनीत पाण्डेय, रोहित मीणा और स्वास्थ्य महानिदेशक (DG Health) डॉ. सुनीता टम्टा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
चरणबद्ध तरीके से हटेंगी 50 एंबुलेंस
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने बताया कि जो एंबुलेंस अपनी निर्धारित समय-सीमा पूरी कर चुकी हैं या बहुत पुरानी हो गई हैं, उन्हें तुरंत बदला जाए। ऐसी करीब 50 एंबुलेंस की पहचान की गई है जो तीन लाख किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय कर चुकी हैं। आपको बता दें कि फिलहाल प्रदेश में 108 सेवा के तहत 272 एंबुलेंस चल रही हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि इन एंबुलेंसों को बदलने का काम चरणबद्ध (फेज वाइज) तरीके से किया जाएगा, लेकिन इस प्रक्रिया में कोई फालतू की देरी नहीं होनी चाहिए।
निगरानी के लिए बनेगा अलग से तंत्र
एंबुलेंस सेवाओं को और बेहतर और असरदार बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर एक मजबूत ‘मॉनिटरिंग मैकेनिज्म’ (निगरानी तंत्र) बनाया जाएगा। एंबुलेंस की सेवाओं की हफ्ते और महीने के आधार पर लगातार जांच की जाएगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत एक समर्पित टीम गठित होगी, जिसका काम रोजाना एंबुलेंस सेवा के कामकाज का विश्लेषण करना होगा ताकि किसी भी कमी को तुरंत सुधारा जा सके।
‘औसत समय’ नहीं, हर मरीज तक पहुंचने का असली टाइम देखा जाएगा
अक्सर एंबुलेंस के लेट पहुंचने की शिकायतें आती हैं। इस पर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि अब एंबुलेंस के रिस्पांस टाइम का आकलन केवल ‘एवरेज टाइम’ के आधार पर नहीं होगा। बल्कि हर एक मामले में यह देखा जाएगा कि एंबुलेंस को मरीज तक पहुंचने में वास्तव में कितना समय लगा। इससे जहां देरी होगी, उसके असली कारणों (जैसे ट्रैफिक, रास्ता खराब होना या लापरवाही) का पता लगाकर सुधार किया जा सकेगा। इसके अलावा, एंबुलेंस में मौजूद जीवनरक्षक उपकरणों (लाइफ सेविंग इक्विपमेंट्स) की हर महीने जांच अनिवार्य कर दी गई है
