Gurmeet singh chandhok

उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन में नई हलचल से मौजूदा पदाधिकारियों में डर दिख रहा है। खबर है कि उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन के एक पदाधिकारी नैनीताल से उधम सिंह नगर ज़िले में अपना बेस बदल रहे हैं। एक व्यक्ति, जिसने किसी भी ज़िला फुटबॉल एसोसिएशन में एक भी कार्यकाल पूरा नहीं किया है, वह कई लोगों से कह रहा है, “मैं उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन में …. (एक बड़ा पद) संभालने जा रहा हूं।”
फुटबॉल एसोसिएशन में चुनावी हलचल तेज!
अब नैनीताल से उधम सिंह नगर जाने के मामले को देखें। हर ज़िला फुटबॉल एसोसिएशन एक कानूनी संस्था होनी चाहिए; इसे सोसाइटी या ‘नॉट-फॉर-प्रॉफिट’ कंपनी के तौर पर रजिस्टर होना ज़रूरी है। हर ज़िला फुटबॉल एसोसिएशन में छह क्लब होने चाहिए और उन्हें अपनी तीन साल की गतिविधियों का ब्यौरा देना होगा। नए इंडियन फुटबॉल संविधान में यही कहा गया है।
सोसाइटी या कंपनी के तौर पर रजिस्टर्ड होना जरूरी
अगर कोई व्यक्ति नैनीताल से उधम सिंह नगर इसलिए जा रहा है क्योंकि वह अपने गृह ज़िले में DFA को सोसाइटी के तौर पर रजिस्टर नहीं करा पाया और ज़िला लीग नहीं करवा पाया, तो इससे कोई खास फायदा नहीं होगा। उसे किसी ऐसे क्लब या अकादमी से जुड़ा होना दिखाना होगा जो सोसाइटी या कंपनी के तौर पर रजिस्टर्ड हो और पिछले तीन सालों से ज़िला फुटबॉल लीग में खेल रहा हो। नैनीताल और उधम सिंह नगर, दोनों ही ज़िलों में ज़िला लीग नहीं हो पाई थी।
उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन में बड़ा पद संभालने का दावा
दूसरा मामला एक ऐसे व्यक्ति का है जो दावा कर रहा है कि वह जल्द ही उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन में कोई बड़ा पद संभालेगा। राज्य कार्यकारी समिति में एक कार्यकाल पूरा किए बिना कोई भी व्यक्ति राज्य फुटबॉल एसोसिएशन का अध्यक्ष, सचिव या कोषाध्यक्ष नहीं बन सकता।
AIFF संविधान की धारा 25.5 में क्या है?
नए AIFF संविधान की धारा 25.5 में यह साफ तौर पर कहा गया है, “कोई व्यक्ति अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या कोषाध्यक्ष के पद के लिए चुनाव लड़ने या नामांकन पाने का पात्र नहीं होगा, जब तक कि वह व्यक्ति SOM न हो, या उसने पहले AIFF की कार्यकारी समिति में कम से कम 1 (एक) पूर्ण कार्यकाल के लिए सदस्य के रूप में काम न किया हो, या AIFF की संबद्ध इकाई में पदाधिकारी के बराबर के पद पर काम न किया हो।”
उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन के इच्छुक उम्मीदवार
नैनीताल से उधम सिंह नगर जाना डर को दिखाता है। हालात तेज़ी से बदल रहे हैं। उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन के इच्छुक उम्मीदवारों को कुछ बातें समझ लेनी चाहिए:-
नक्शेदेखें
- पुराने समय की तरह हेर-फेर करना अब संभव नहीं है।
- उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन को तीन हफ़्ते पहले वोटरों की लिस्ट जारी करनी होगी।
- रिटर्निंग ऑफ़िसर आपत्तियां मंगाएंगे और वोटरों की फ़ाइनल लिस्ट तैयार करेंगे।
- खेल से जुड़े सभी विवादों के लिए केंद्र सरकार का स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल जल्द ही काम करना शुरू कर देगा।
- आप कब तक भागते रहेंगे!
