Gurmeet singh chandhok

हल्द्वानी। थाना काठगोदाम क्षेत्र में जुलाई 2023 में दर्ज नाबालिग युवती को बहला-फुसलाकर ले जाने, दुष्कर्म और अन्य आरोपों से जुड़े मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ता लोकेश राज चौधरी के अनुसार अभियोजन पक्ष आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा।
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अधिवक्ता के अनुसार, मामले में काठगोदाम पुलिस ने 29 अगस्त 2023 को भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 376(2)(द), 506, उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3(1) व 5(1) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5/6 के तहत आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। आरोपी करीब 11 माह 14 दिन जेल में रहा, जिसके बाद उसे हाईकोर्ट से जमानत मिली।
बचाव पक्ष के अनुसार अभियोजन की ओर से कुल 11 गवाह पेश किए गए। अधिवक्ता का कहना है कि पीड़िता के बयानों में घटना के समय उसकी नाबालिग होने की स्थिति स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई और घटना की तिथि अथवा वर्ष भी स्पष्ट नहीं बताया गया। साथ ही, पीड़िता के बयानों में कथित धर्म परिवर्तन का भी कोई उल्लेख नहीं किया गया।
अधिवक्ता चौधरी के अनुसार एफएसएल रिपोर्ट में भी अभियोजन के आरोपों को पुष्ट करने वाली कोई बात सामने नहीं आई। इन परिस्थितियों के आधार पर बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि अभियोजन अपने मामले को संदेह से परे प्रमाणित नहीं कर सका।
