Gurmeet singh chandhok
संसद के मानसून सत्र के दौरान इन दिनों भारी हंगामा और गतिरोध देखने को मिल रहा है। इसी बीच, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष को एक बड़ा और चौंकाने वाला प्रस्ताव दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि सरकार संसद के अंदर हर मुद्दे पर खुली चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है और विपक्ष के तीखे से तीखे सवालों का जवाब देने से बिल्कुल पीछे नहीं हटेगी। शाह के इस ओपन ऑफर के बाद राजनीतिक गलियारों में अचानक हलचल तेज हो गई है।
विपक्ष से बोले अमित शाह- ‘लिखित में दीजिए, मैं खुद दूंगा जवाब’
गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्षी दलों से साफ कहा कि अगर वे वाकई किसी खास मुद्दे पर सरकार से चर्चा चाहते हैं, तो वे इसके बारे में लिखित में जानकारी दें। सरकार तुरंत उस पर बहस के लिए तैयार हो जाएगी। उन्होंने यहां तक आश्वस्त किया कि वह खुद पूरी चर्चा के दौरान सदन में मौजूद रहेंगे और विपक्ष के हर सवाल का डटकर जवाब देंगे।
अमित शाह ने विपक्ष के लगातार हंगामे और सदन की कार्यवाही बाधित होने पर कड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष दोनों सदनों को चलने ही नहीं देगा, तो सरकार वहां जाकर क्या करेगी। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ तो वे हर बात पर चर्चा की मांग करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ सदन को शांति से चलने नहीं देते। ऐसे में वे खुद तय करें कि चर्चा का रास्ता कैसे निकलेगा।
‘आज दोपहर 3 बजे से शुरू करें चर्चा, कल दूंगा जवाब’
विपक्ष के सामने एक स्पष्ट समयसीमा रखते हुए गृहमंत्री ने कहा कि वे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर चर्चा की मांग रख सकते हैं, जिसके बाद उसी दिन दोपहर 3 बजे से सदन में बहस शुरू की जा सकती है। अमित शाह ने चुनौती भरे अंदाज में कहा कि वह अगले दिन दोपहर 3 बजे इस पूरी चर्चा का जवाब देने के लिए खुद तैयार बैठेंगे। इस प्रकार उन्होंने विपक्ष को सीधे तौर पर सदन के अंदर आमने-सामने की बहस का विकल्प दे दिया है।
‘सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है’
अमित शाह ने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ भी नहीं है और वह किसी भी सवाल से भाग नहीं रही है। इस दौरान उन्होंने विपक्ष द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ‘लापता’, ‘भाग गए’ और ‘भगोड़े’ जैसे तंज कसने वाले शब्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष इन मुद्दों पर भी बात करना चाहता है, तो सरकार उस पर भी जवाब देने से नहीं कतराएगी। शाह ने यह भी कहा कि चर्चा के दौरान वह देश को यह भी बताएंगे कि आखिर विपक्ष क्यों नहीं चाहता कि संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चले। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विपक्ष सरकार के इस खुले प्रस्ताव को स्वीकार करता है या अपना विरोध यूं ही जारी रखता है।
