Gurmeet singh chandhok

देहरादून। उत्तराखंड में शासन स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर एक बार फिर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। सरकार की महत्वाकांक्षी दीनदयाल उपाध्याय होम-स्टे योजना में कथित अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के आरोपों के बाद उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (यूटीडीबी) ने सख्त कदम उठाते हुए देहरादून के जिला पर्यटन विकास अधिकारी (डीटीडीओ) बृजेन्द्र पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।
जानकारी के अनुसार हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो और शिकायतें सामने आई थीं, जिनमें आरोप लगाया गया कि होम-स्टे योजना के लाभार्थियों से सरकारी अनुदान जारी करने के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही थी। शिकायतों के संज्ञान में आने के बाद उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने मामले की प्रारंभिक समीक्षा की। आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करते हुए निलंबन का निर्णय लिया गया।
उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि बृजेन्द्र पाण्डेय के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित है। इसी के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है ताकि निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जा सके।
मामले की जांच के लिए परिषद ने अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेन्द्र सिंह भण्डारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। जांच के दौरान वायरल वीडियो, प्राप्त शिकायतों, संबंधित दस्तावेजों तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा। जांच अधिकारी अपनी रिपोर्ट परिषद को सौंपेंगे, जिसके आधार पर आगे की विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।
गौरतलब है कि दीनदयाल उपाध्याय होम-स्टे योजना राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को होम-स्टे निर्माण एवं विकास के लिए सरकारी अनुदान प्रदान किया जाता है। ऐसे में इस योजना में कथित भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने के बाद विभाग की ओर से की गई त्वरित कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निलंबन आदेश के अनुसार बृजेन्द्र पाण्डेय निलंबन अवधि के दौरान उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद मुख्यालय, देहरादून से संबद्ध रहेंगे। उन्हें सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) देय होगा। इसके लिए उन्हें यह प्रमाणित करना होगा कि वे इस अवधि में किसी अन्य सेवा, व्यवसाय अथवा रोजगार से संबद्ध नहीं हैं। यदि ऐसा पाया जाता है तो उनके विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी
