
चारधाम यात्रा की शुरुआत के साथ ही व्यवस्थाओं को लेकर बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। केदारनाथ धाम में सामने आई एक दर्दनाक घटना ने हेलीकॉप्टर सेवाओं और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है।
चारधाम यात्रा में बदइंतजामी!
बता दें 22 अप्रैल को बाबा केदारनाथ धाम कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं। जिसके बाद ही से बाबा के दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आ रहे हैं। गुजरात से आया एक टूर ऑपरेटर अपने माता-पिता समेत अन्य यात्रियों को दर्शन कराने पहुंचा था। पैदल मार्ग के दौरान उसके पिता अचानक चक्कर खाकर गिर पड़े। परिजन ने तुरंत हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर मदद मांगी, लेकिन आरोप है कि समय पर कोई सहायता नहीं पहुंची।
स्थिति बिगड़ती देख पिट्ठू में बैठाकर पिता को पहुंचाया स्वास्थ्य केंद्र
स्थिति बिगड़ती देख बेटे ने खुद ही अपने पिता को पिट्ठू में बैठाकर किसी तरह नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया। लेकिन वहां पहुंचने तक काफी देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पीड़ित लगातार जिला प्रशासन और अधिकारियों से मदद की गुहार लगा रहा है। वह अपने पिता के शव को गुजरात पहुंचाने के लिए भी अधिकारियों से लगातार अपील कर रहा है, लेकिन उसका कहना है कि अब तक कोई ठोस सहायता नहीं मिली है। आरोप है कि उसके पिता का शव काफी देर तक धूप में ही पड़ा रहा है, जो व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
हेलीकॉप्टर सेवाओं और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की खुली पोल
इस घटना के बाद हेलीकॉप्टर सेवाओं की उपलब्धता और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति में त्वरित रेस्क्यू और मेडिकल सहायता की व्यवस्था होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन इस मामले ने उन दावों की वास्तविकता सामने ला दी है।
हवाहवाई निकला मंत्री के दावा!
वहीं दूसरी ओर, स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने हाल ही में कहा था कि चारधाम यात्रा प्रदेश की आस्था और पहचान का केंद्र है और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सुविधाओं को हर स्तर पर मजबूत रखा जाए और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार के स्तर पर इतने सख्त निर्देश दिए गए हैं, तो जमीनी स्तर पर ऐसी लापरवाही क्यों सामने आ रही है? क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी सिर्फ आश्वासनों तक सिमट कर रह जाएगा?
