
उत्तराखंड की राजनीति का इन दिनों पारा चढ़ा हुआ है। गृह मंत्री अमित शाह के आगामी दौरे को लेकर बीजेपी में उत्साह के साथ-साथ बेचैनी भी है। बेचैनी की वजह वो विधायक है जो दबी जुंबा में सवाल कर रहे हैं कि शाह जी आएंगे, तो क्या क्या लाएंगे, क्या इस बार खाली पड़े मंत्री पदों को भरने का ग्रीन सिग्नल देकर जाएंगे या नहीं।
उत्तराखंड में अमित शाह के दौरे से हलचल तेज
उत्तराखंड की शांत वादियों में इन दिनों एक सियासी तपिश महसूस की जा रही है। वजह है अमित शाह का दौरा। सियासत के चाणक्य कहे जाने वाले नेता गृह मंत्री अमित शाह 7 मार्च को का उत्तराखंड दौरे पर रहेंगे। कहा जा रहा है ये उनका केवल एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि भाजपा के लिए मिशन 2027 का ब्लूप्रिंटहै।
धामी सरकार के चार साल पूरे होने जा रहे हैं, एक तरफ चार साल का जश्न होगा तो दूसरी तरह उन विधायकों के दिल की धड़कने तेज होगी जो मंत्रिमंडल में मंत्री पद की आस लगाए बैठे है। क्योंकि इन दिनों धामी सरकार के चार साल के जश्न की चर्चाएं कम ब्लकि कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट ज्यादा है।
अमित शाह के दौरे से नेताओं को उम्मीद
बता दें धामी कैबिनेट के विस्तार को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। कभी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिल्ली दौरे पर, कभी होली और दिवाली के त्योहारों पर, कभी जे.पी. नड्डा के दौरे पर, और अब अमित शाह के दौरे पर कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है।
सूत्रों की माने तो कैबिनेट में 5 खाली पदों को भरने के लिए हाईकमान ने विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तक तलब कर लिया है। यानि खाली पदों को भरने के लिए परफॉरमेंसबेस्ड फॉर्मूला लागू होगा। इस बार उन नेताओं को मंत्री पद का तोहफा मिलेगा जो सत्ता विरोधी लहर के खतरे को कम करते हुए डबल इंजन की रप्तार को आगे बढ़ाने में दम रखते हो। खैर सबकी निगाहें अब शाह के दौरे पर टिकी है
