
राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 और इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 के विरोध में देशभर में बिजली कर्मियों ने गुरुवार को एक दिन की हड़ताल कर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के आह्वान पर करीब 27 लाख कर्मचारी और अभियंता इस विरोध में शामिल बताए जा रहे हैं।
निजीकरण के विरोध में हड़ताल
राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 और इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 के विरोध में गुरुवार को बिजली कर्मी एक दिन की हड़ताल पर हैं। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के आह्वान पर देशभर के करीब 27 लाख कर्मचारी और अभियंता इस हड़ताल में शामिल हैं। दरअसल, राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 और प्रस्तावित बिजली सुधारों के विरोध में बिजली कर्मियों ने मोर्चा खोल दिया है।
निजीकरण हुआ तो बिजली दरों में होगी बढ़ोतरी
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन का आरोप है कि सरकार बिजली व्यवस्था को धीरे-धीरे निजी कंपनियों के हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। फेडरेशन का कहना है कि अगर निजीकरण हुआ तो आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और बिजली दरों में बढ़ोतरी हो सकती है।
दूरस्थ इलाकों में प्रभावित हो सकती है बिजली आपूर्ति
बिजली कर्मियों का दावा है कि सरकारी डिस्कॉम पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रही है। ऐसे में निजी कंपनियों के प्रवेश से व्यवस्था और कमजोर होगी। फेडरेशन का कहना है कि निजीकरण से ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, क्योंकि निजी कंपनियां मुनाफे वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देती हैं।
